लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को स्वीकार करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधित दरें 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में प्रभावी होंगी।
नई व्यवस्था के तहत राज्य को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-1 में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद को शामिल किया गया है, जबकि नगर निगम वाले जिले श्रेणी-2 में और बाकी सभी जिले श्रेणी-3 में रखे गए हैं। इस वर्गीकरण के आधार पर अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी तय की गई है।
सरकारी निर्णय के मुताबिक श्रेणी-1 के जिलों में काम करने वाले कुशल श्रमिकों की मासिक आय में करीब 3288 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में श्रमिकों की मजदूरी में कम से कम 1335 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह फैसला नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलनों के बाद लिया गया, जहां मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसने गौतमबुद्ध नगर का दौरा कर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नियोक्ताओं से बातचीत की।
समिति के समक्ष श्रमिकों ने महंगाई, किराए में बढ़ोतरी और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को प्रमुख मुद्दा बताया, जबकि उद्योग प्रतिनिधियों ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और सप्लाई चेन बाधाओं का हवाला दिया।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत यह संशोधन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट में 2017 और 2024 में प्रस्तावित संशोधनों का भी उल्लेख किया गया, जो अब 2026 के नए सूचकांक के अनुसार लागू किए जा रहे हैं। सरकार ने इसे अंतरिम राहत के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। हालांकि, ईंट-भट्ठा उद्योग को इस आदेश से बाहर रखा गया है।
मार्च तक प्रदेश में एक समान न्यूनतम मजदूरी लागू थी, जिसमें अकुशल श्रमिकों को 11,021 रुपये, अर्द्धकुशल को 12,123 रुपये और कुशल श्रमिकों को 13,580 रुपये प्रतिमाह मिलते थे।
नई दरों के अनुसार अब श्रेणीवार मजदूरी इस प्रकार होगी—
श्रेणी-1 (गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद)
अकुशल: 13,690 रुपये
अर्द्धकुशल: 15,059 रुपये
कुशल: 16,868 रुपये
श्रेणी-2 (नगर निगम वाले जिले)
अकुशल: 13,006 रुपये
अर्द्धकुशल: 14,306 रुपये
कुशल: 16,025 रुपये
श्रेणी-3 (अन्य जिले)
अकुशल: 12,356 रुपये
अर्द्धकुशल: 13,590 रुपये
कुशल: 15,224 रुपये