मुजफ्फरनगर। इटली में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए सर्वोच्च कृषि सम्मान ‘एग्रीकोला मेडल’ को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी इस सम्मान पर किसान संगठनों और राजनीतिक हलकों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

किसान कल्याण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बालियान ने प्रधानमंत्री को मिले इस सम्मान को भारत की कृषि नीतियों और किसानों के प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि FAO यह सम्मान दुनिया के चुनिंदा राष्ट्राध्यक्षों और विशिष्ट व्यक्तित्वों को ही प्रदान करता है, जो वैश्विक स्तर पर योगदान के लिए दिया जाता है।

बालियान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान किसानों के हित में किए गए कार्यों, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और मोटे अनाज (श्रीअन्न) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक फसलों को वैश्विक बाजार में स्थापित करने में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।


उन्होंने आगे कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रधानमंत्री की नहीं, बल्कि पूरे देश और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए गर्व का विषय है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और मजबूत हुई है।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस सम्मान पर अलग राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इटली स्थित एक कृषि संस्था द्वारा यह सम्मान दिया गया है और ऐसे सम्मान पहले भी दिए जाते रहे हैं, लेकिन अब सरकार इनकी अधिक प्रचार-प्रसार के साथ चर्चा कर रही है।

टिकैत ने कहा कि सम्मान मिलना सकारात्मक बात है, लेकिन यदि यह कृषि क्षेत्र से जुड़ा पुरस्कार है तो इसे किसानों को समर्पित किया जाना चाहिए, क्योंकि असली मेहनत खेतों में किसान ही करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि को जो पहचान मिल रही है, उसमें किसानों का योगदान सबसे अहम है। इस मुद्दे को लेकर अब किसान संगठनों के बीच अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं और चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है।