मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो गईं। जनगणना 2027 के प्रशिक्षण में अधिकांश फार्मासिस्टों के शामिल होने के कारण दवा वितरण काउंटर समय पर नहीं खुल सके, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुबह से लगी लंबी कतारें
सुबह करीब 8 बजे से ही अस्पताल परिसर में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी थी। लेकिन फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति के चलते दवा वितरण पूरी तरह बाधित रहा। इस दौरान रेबीज इंजेक्शन जैसी जरूरी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हो सकीं, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मरीजों और तीमारदारों में नाराजगी
अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कर्मचारियों को प्रशिक्षण में भेजना मरीजों के हितों के खिलाफ है। कई लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

मरीजों का दर्द
रसूलपुर जाटान गांव निवासी प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि वह रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आए थे, लेकिन सुबह 11 बजे तक काउंटर नहीं खुला। उन्होंने करीब दो घंटे तक लाइन में इंतजार किया। वहीं, मरीज शहजाद ने बताया कि वह सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने से उन्हें वापस लौटना पड़ा।
करीब तीन घंटे बाद सामान्य हुई स्थिति
करीब 11 बजे फार्मासिस्ट प्रशिक्षण से वापस बुलाए गए, जिसके बाद दवा वितरण काउंटर खोले गए और मरीजों को राहत मिली। इसके बाद अस्पताल में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और मरीजों ने राहत की सांस ली। इस दौरान मरीजों को लगभग तीन घंटे तक असुविधा झेलनी पड़ी।
प्रशासन का बयान
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि सभी फार्मासिस्ट जनगणना प्रशिक्षण में गए हुए थे, जिसके कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि स्थिति बिगड़ने पर सभी को वापस बुला लिया गया और अब उन्हें अस्पताल में ड्यूटी पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।