मुजफ्फरनगर के भोपा रोड स्थित मखियाली गांव में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इलाके में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और एक किसान के गांव छोड़ने के बाद यह मामला अब प्रशासन तक पहुंच गया है, जिसके बाद अधिकारियों ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है।

मखियाली निवासी जितेन्द्र कुमार के गांव से पलायन करने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। जितेन्द्र का आरोप है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से गांव में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके मुताबिक आसपास स्थित पेपर मिलों से निकलने वाला जहरीला धुआं और रसायन युक्त पानी लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है।


उन्होंने यह भी बताया कि वह स्वयं गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और इलाज पर अब तक 20 से 25 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। वर्तमान में उन्हें आंखों से जुड़ी समस्या भी हो रही है, जिससे उनका जीवन प्रभावित हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बिन्दल, गर्ग और सिल्वरटोन जैसी औद्योगिक इकाइयों से लगातार वायु और जल प्रदूषण फैल रहा है, जिसके कारण गांव का पानी पीने योग्य नहीं बचा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने और जांच टीमों के दौरे के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

मामले के बढ़ते दबाव को देखते हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उधर, किसान नेता धर्मेन्द्र मलिक ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।