उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में होने वाली सभी भर्ती और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता के तहत नकल माफियाओं और भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी की जा रही है।

एसटीएफ उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत अप्रैल 2025 में आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएँ प्राप्त हुईं।

मुख्यमंत्री के आदेश पर गोपनीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा की गोपनीय और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान यह सामने आया कि तीन व्यक्तियों—महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल—ने फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करके अभ्यर्थियों से अवैध धन वसूला।

एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को इन तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इस मामले में थाना विभूतिखंड, लखनऊ में मुकदमा संख्या 144/25, धारा 112, 308(5), 318(4) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज किया गया। जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष ने त्यागपत्र दे दिया, क्योंकि अभियुक्त महबूब अली उनकी निजी सचिवता में कार्यरत था।

पूछताछ में खुलासा
पूछताछ के दौरान महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान कई विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए थे और उन्हें अभ्यर्थियों को अवैध धन लेकर उपलब्ध कराया। एसटीएफ की गहन विवेचना और डेटा एनालिसिस से इसकी पुष्टि हुई।

जांच के दौरान अभियुक्तों और उनके संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया गया। इससे कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान हुई। आयोग को इन अभ्यर्थियों का डेटा भेजा गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है।

परीक्षा रद्द, दोबारा आयोजन का आदेश
इन तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा रद्द करने के आदेश दिए हैं। आयोग को निर्देशित किया गया है कि इस परीक्षा का दोबारा आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जाए।