प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर गेहूं खरीद प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है। मौसम खराब रहने की वजह से खरीद की गति कुछ दिनों के लिए धीमी पड़ गई है, हालांकि विभाग का मानना है कि मौसम सामान्य होते ही खरीद में फिर तेजी आएगी। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में गेहूं भंडारण और खरीद के लिए पर्याप्त मात्रा में बारदान (बोरे) उपलब्ध हैं और किसी भी स्तर पर कमी की स्थिति नहीं है।
खाद्य एवं रसद विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 8 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है। सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन लगभग 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा रहा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों की बारिश के चलते यह आंकड़ा घटकर करीब 40 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन रह गया है।
इस वर्ष केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश को 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है, जबकि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर 60 लाख मीट्रिक टन तक खरीद का अनुमान रखा है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खुले बाजार में गेहूं के दाम बढ़ने से कई किसान फिलहाल अपनी उपज रोककर रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि उन्हें आगे बेहतर कीमत मिल सके।
हाल ही में विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि खरीद केंद्रों पर बारदान की कमी के कारण गेहूं खरीद प्रभावित हो रही है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
प्रमुख सचिव, खाद्य एवं रसद विभाग रणवीर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि पहले से ही लगभग 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए आवश्यक बोरे उपलब्ध थे और अतिरिक्त आपूर्ति भी निर्धारित समय में पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले सात दिनों में और बारदान उपलब्ध हो जाएंगे, जिससे कुल 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित हो जाएगी। प्रदेश के किसी भी जिले में बारदान की कोई कमी नहीं है।