रुद्रप्रयाग में केदारनाथ मंदिर में पुजारी की नियुक्ति को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। यह मामला अब धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक निर्णयों के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है।
रावल ने जताई आपत्ति, पत्र लिखकर दी चेतावनी
धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सहित प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हाल ही में जारी पुजारी नियुक्ति आदेश पर कड़ा ऐतराज जताया है। रावल का कहना है कि यह नियुक्ति मंदिर की परंपराओं के विपरीत की गई है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे ऊखीमठ स्थित वैराग्यपीठ (उषा मठ) में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
परंपरा और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
पत्र में रावल ने स्पष्ट किया है कि केदारनाथ सहित मध्यमेश्वर, ओंकारेश्वर और विश्वनाथ मंदिरों में पूजा के लिए चक्रवार व्यवस्था के तहत पांच पुजारियों की नियुक्ति होती है। इनमें से चार पुजारी मुख्य रूप से पूजा कार्य संभालते हैं, जबकि एक को रिजर्व रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से एक पद रिक्त चल रहा था, जिस पर परंपरा के अनुसार शांत लिंग की नियुक्ति होनी थी। इस संबंध में पिछले दो वर्षों में मंदिर समिति को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन स्थायी नियुक्ति नहीं की गई। इस दौरान शांत लिंग को अस्थायी रूप से गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर में तैनात किया गया था।
बिना सहमति नियुक्ति का आरोप
रावल का आरोप है कि उनकी संस्तुति के बिना 27 मई को ईश्वर लिंग को केदारनाथ मंदिर का पुजारी नियुक्त कर दिया गया, जो न केवल परंपरा के खिलाफ है बल्कि उनके अधिकारों का भी उल्लंघन है।
उन्होंने तीन दिनों के भीतर इस नियुक्ति आदेश को रद्द करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे।
स्वास्थ्य और जिम्मेदारी का भी उल्लेख
अपने पत्र में रावल ने यह भी बताया है कि उनकी हाल ही में हृदय की सर्जरी हुई है और उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है। ऐसे में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य हानि की जिम्मेदारी मंदिर समिति की होगी, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया है।
मंदिर समिति का पक्ष
वहीं, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने कहा है कि पुजारी की नियुक्ति पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत की गई है और इसमें नियमों का पालन किया गया है।