बिजनौर। गैंगस्टर अतीक अहमद से जुड़ी संपत्तियों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहसपुर क्षेत्र के याकूबपुर गांव में स्थित मीट प्लांट समेत कुल 168.13 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क कर दिया है। इस कार्रवाई में करीब 5.951 हेक्टेयर भूमि भी शामिल है।
जिला मजिस्ट्रेट जालौन के आदेश पर बुधवार को राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने मीट प्लांट को सील कर उसे उप जिलाधिकारी धामपुर के सुपुर्द कर दिया। बताया गया कि प्रशासनिक टीम एक दिन पहले ही तैयारी के लिए बिजनौर पहुंच गई थी।
जानकारी के अनुसार, दिल्ली और बिजनौर के सहसपुर निवासी अतीक अहमद के खिलाफ जालौन और बिजनौर में गैंगस्टर एक्ट सहित कुल पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि संगठित गिरोह के जरिए अवैध गतिविधियों से अर्जित धन से यह संपत्ति खरीदी और विकसित की गई थी।
गैंगस्टर एक्ट के तहत थाना एट में दर्ज मामले के आधार पर मंगलवार को जालौन पुलिस ने स्योहारा क्षेत्र में संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर प्रस्तावित कुर्की की जानकारी दी थी। इसके बाद बुधवार सुबह लगभग नौ बजे जालौन पुलिस और राजस्व विभाग की टीम उमर इंटरनेशनल मीट प्लांट पहुंची।
कार्रवाई से पहले मुनादी कराई गई और गाटा संख्या 12, 40, 44(1), 45, 46, 47, 52, 54, 101 और 102 सहित कुल 5.951 हेक्टेयर भूमि को कुर्क करते हुए स्थान-स्थान पर बोर्ड लगाए गए। इसके बाद एसडीएम धामपुर स्मृति मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने प्लांट के मुख्य द्वार, भवन और अन्य हिस्सों को सील कर संपत्ति को प्रशासनिक नियंत्रण में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान अतीक अहमद मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि प्लांट प्रबंधन से जुड़े हाजी जब्बार अहमद और उनके भाई इदरीश अहमद वहां उपस्थित रहे। मौके पर सीओ धामपुर, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा।
प्रशासन के मुताबिक, कुर्क की गई जमीन का मूल्य करीब 151.53 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि भवन, शेड, ढांचा और अन्य परिसंपत्तियों की कीमत लगभग 16.59 करोड़ रुपये बताई गई है। इस तरह कुल संपत्ति का मूल्य 168.13 करोड़ रुपये से अधिक है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में जालौन के थाना एट में अतीक अहमद समेत पांच लोगों पर गो-तस्करी का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद 2024 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी। वहीं 2018 में सील किया गया यह मीट प्लांट इस साल 20 जनवरी को उच्च न्यायालय के आदेश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद अब एक बार फिर यह परिसर प्रशासनिक कार्रवाई के चलते चर्चा में आ गया है।