नई दिल्ली। भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के क्षेत्र में घरेलू निर्माण को मजबूत करने के लिए एक नई तकनीक पेश की है। इसका उद्देश्य देश में उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमता बढ़ाना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है।
नई तकनीक और लॉन्च
सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) में 30 किलोवाट की वाइड-बैंड गैप (WBG) आधारित Integrated Drive System (IDS) का उद्घाटन किया गया। यह सिस्टम खासतौर से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तैयार किया गया है और इसे स्वदेशी तकनीकी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
कौन और कैसे विकसित कर रहा है
इस IDS को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, तिरुवनंतपुरम ने IIT मद्रास और Lucas TVS के सहयोग से विकसित किया है। यह परियोजना नेशनल मिशन ऑन पावर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी के तहत लाई गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसकी जानकारी साझा की।
30 kW पावर कैटेगरी का महत्व
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 30 kW कैटेगरी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन सेगमेंट, कॉम्पैक्ट कारों और शेयर्ड मोबिलिटी फ्लीट्स के लिए उपयुक्त है। यहां कम लागत और अधिक दक्षता वाले पावरट्रेन की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मौजूदा सिस्टम में समस्या
अभी भारत में हाई-परफॉर्मेंस EV पावरट्रेन और कई महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स का अधिकतर हिस्सा आयात किया जाता है। इससे लागत बढ़ती है और सप्लाई चेन विदेशी पर निर्भर रहती है।
स्वदेशी IDS के फायदे
नई IDS तकनीक से आयात पर निर्भरता घटेगी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के जरिए लागत कम होगी। इसके साथ ही यह उत्पादन से जुड़ी योजनाओं जैसे PLI (Production Linked Incentive) के अनुरूप बड़े पैमाने पर निर्माण को भी बढ़ावा देगा।
तकनीकी बनावट और विशेषताएँ
यह सिस्टम इलेक्ट्रिक मोटर और इन्वर्टर को एक ही कॉम्पैक्ट यूनिट में जोड़ता है, जबकि पारंपरिक सेटअप में ये अलग-अलग होते हैं। इस इंटीग्रेटेड डिजाइन से पावर डेंसिटी बेहतर होती है, जगह की बचत होती है और आधुनिक EV प्लेटफॉर्म के लिए उपयुक्त बनता है।
भारत के EV इकोसिस्टम पर असर
सरकार का मानना है कि ऐसे स्वदेशी ड्राइव सिस्टम्स के व्यापक इस्तेमाल से भारत की EV सप्लाई चेन मजबूत होगी। इससे पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित हार्डवेयर निर्माण में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, सेमीकंडक्टर आधारित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तकनीकों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।