हरियाणा सरकार ने राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एग्रीगेटर लाइसेंस से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत कैब, डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं से जुड़े वाहनों को अब केवल स्वच्छ ईंधन आधारित विकल्पों पर ही चलाने की अनुमति होगी।

एनसीआर में डीजल-पेट्रोल वाहनों पर सख्ती

नए नियमों के अनुसार एनसीआर में काम करने वाले कैब एग्रीगेटर, डिलीवरी कंपनियां और ई-कॉमर्स सर्विस प्रोवाइडर अब अपने बेड़े में नए पेट्रोल या डीजल वाहनों को शामिल नहीं कर सकेंगे। केवल CNG, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी चालित और अन्य स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, क्षेत्र में केवल CNG और इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा को ही अतिरिक्त परमिट मिलेगा।

यह फैसला सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिनमें 1 जनवरी 2026 से एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगाने की बात कही गई थी।

नया नियम और सुरक्षा व्यवस्था

सरकार ने हरियाणा मोटर वाहन नियम 1993 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया जाएगा।

नए प्रावधानों में लाइसेंस अनिवार्य करना, ड्राइवर और वाहन पंजीकरण, यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था, शिकायत निवारण तंत्र, प्रशिक्षण और किराया नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

बीमा और सुरक्षा सुविधाएं अनिवार्य

नए नियमों के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा, ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये तक का जीवन बीमा सुनिश्चित करना होगा।

इसके साथ ही सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा। कंपनियों को 24 घंटे चलने वाला हेल्पलाइन और शिकायत केंद्र भी स्थापित करना होगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में 100 प्रतिशत छूट देने पर भी विचार कर रही है। वर्तमान में EV रजिस्ट्रेशन पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि इस कदम से लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित होंगे।

इसके अलावा राज्य सरकार 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की योजना पर भी काम कर रही है, जिससे सार्वजनिक परिवहन को और अधिक स्वच्छ और आधुनिक बनाया जा सकेगा।