नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की तैयारियों के बीच विमानन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। एयरपोर्ट क्षेत्र में पक्षियों और जानवरों से होने वाले संभावित खतरे को रोकने के लिए 10 किलोमीटर के दायरे में कई गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत लागू किया गया है।

एयरपोर्ट के एरांड्रोम रेफरेंस प्वाइंट से तय की गई इस सीमा के भीतर पशुओं के वध, उनकी खाल उतारने, कचरा या दुर्गंधयुक्त और प्रदूषित सामग्री जमा करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही मीट की दुकानें और हड्डी प्रसंस्करण इकाइयों से निकलने वाला ऐसा कोई भी अपशिष्ट, जिससे पक्षी या जंगली जानवर आकर्षित हो सकते हैं, प्रतिबंधित कर दिया गया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब संचालन शुरू करने के लिए एरोड्रम लाइसेंस का इंतजार किया जा रहा है। इससे पहले किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न हो, इसके लिए पर्यावरण प्रबंधन समिति ने नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।

भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 की धारा 10 (उपधारा 2, खंड ZB) के अनुसार, विमान और पक्षियों के टकराव की आशंका को कम करने के लिए 10 किलोमीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में खुले कचरे, जानवरों के अवशेष और दुर्गंध फैलाने वाली वस्तुओं का निस्तारण पूरी तरह वर्जित है।

इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यमुना प्राधिकरण और स्थानीय निकायों ने प्रभावित क्षेत्रों में सार्वजनिक सूचना बोर्ड लगाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो दोष सिद्ध होने पर तीन साल तक की जेल, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

हकीकत में ज्यादा, रिकॉर्ड में कम दुकानें
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों में एयरपोर्ट के आसपास केवल आठ मीट दुकानों के पंजीकरण की जानकारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर 10 किलोमीटर के दायरे में 100 से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। केवल एयरपोर्ट के कार्गो विलेज गेट के पास ही एक दर्जन से ज्यादा दुकानों पर मांस की बिक्री हो रही है।

अनेक स्थानों पर पशुओं को काटने के बाद उनके अवशेष खुले में फेंक दिए जाते हैं, जिससे मांसाहारी पक्षी बड़ी संख्या में वहां पहुंच जाते हैं। अधिकारियों के लिए यह स्थिति विमानन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती बनी हुई है।

फिलहाल एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्र में मांस और मछली की बिक्री के लिए केवल आठ दुकानों के पास वैध लाइसेंस हैं। खुले में कारोबार करने वाले दो दुकानदारों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा चुकी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. रविंद्र नाथ वर्मा के अनुसार, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद नियमों के दायरे में न आने वाली सभी दुकानों को बंद कराया जाएगा।