देश में शिक्षा और पाठ्यक्रम को लेकर उठ रहे विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ जैसे विषयों को शामिल करने से जो बहस पैदा हुई, उसे समय रहते बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
“सरकार किसी वर्ग के खिलाफ नहीं”
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा किसी को अपमानित करने की नहीं है। उन्होंने कहा,
“हमारा संवैधानिक कर्तव्य है कि समाज के किसी भी वर्ग—अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)—के साथ भेदभाव न हो। हम समानता के पक्षधर हैं।”
NCERT विवाद: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नया पाठ्यक्रम
कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' और जजों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर विवाद हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद NCERT ने किताब को वापस ले लिया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि अब जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी इस अध्याय को फिर से तैयार कर रही है। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल और प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी शामिल हैं। नई सामग्री तैयार होने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
UGC इक्विटी रेगुलेशन पर सस्पेंस जारी
जनवरी 2026 में लागू हुए UGC इक्विटी रेगुलेशन का मकसद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकना है। हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्रों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार इसे पूरी निष्ठा से लागू करेगी।
धर्मेंद्र प्रधान के बयान से यह स्पष्ट है कि भविष्य में शिक्षा और न्यायपालिका के बीच समन्वय और संवेदनशीलता को लेकर विशेष ध्यान दिया जाएगा।