धार भोजशाला पर ASI रिपोर्ट पेश, खिलजीकालीन शिलालेख में मंदिर-मूर्तियों का उल्लेख

इंदौर। धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की नई रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस परिसर में पहले एक प्राचीन मंदिर और शैक्षणिक मठ मौजूद था, जिसे मुगल-पूर्व काल में ध्वस्त कर वहां स्थापित मूर्तियों को नष्ट किया गया। इस दावे की पुष्टि अब्दुल्ला शाह चंगाल के मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख से होती है।
एएसआई की रिपोर्ट (खंड-4, पृष्ठ 260) में उल्लेख है कि यह शिलालेख 1436 से 1469 ई. तक मालवा सल्तनत के सुल्तान महमूद खिलजी के समय का है। शिलालेख की 17वीं और 18वीं पंक्तियों में स्पष्ट लिखा है कि परिसर में पहले धार्मिक मंदिर और मठ थे, जिनमें देवताओं की मूर्तियां स्थापित थीं। बाद में इन्हें नष्ट कर इस स्थान को मस्जिद और मजार में बदल दिया गया।
हाई कोर्ट में विचाराधीन विवाद
भोजशाला के सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर बनाम मौला कमाल दरगाह मस्जिद मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ में चल रही है। 2024 में एएसआई द्वारा 98 दिनों तक किए गए वैज्ञानिक सर्वे के बाद 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट पेश की गई थी। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों से इस रिपोर्ट पर आपत्तियां मांगी हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को प्रस्तावित है।
शिलालेख और वास्तु अवशेषों से संकेत
एएसआई ने फारसी में अंकित शिलालेख का अंग्रेजी और हिंदी अनुवाद भी रिपोर्ट में शामिल किया है। हिजरी संवत 859 (1455 ई.) के शिलालेख में उल्लेख है कि एक शासक बड़ी सेना के साथ यहां आया, देवताओं की मूर्तियां नष्ट कीं और पूजा स्थल को जबरन मस्जिद में बदल दिया गया।
सर्वे के दौरान पाए गए खंभों, स्तंभखंडों और मूर्तियों के अवशेष बताते हैं कि मूल मंदिर की पत्थर की संरचना को बाद में मस्जिद के रूप में बदल दिया गया। खिड़की फ्रेम और स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां अभी भी आंशिक रूप से संरक्षित हैं, जबकि कुछ खंभे क्षतिग्रस्त हैं।
विभिन्न पक्षों के बयान
डीके रिछारिया, सेवानिवृत अधिकारी, एएसआई, धार:
"भोजशाला का रूप बदल गया है। मंदिर को मस्जिद में बदलने के लिए इमारत को नुकसान पहुंचाया गया। शिलालेख भी यही पुष्टि करता है।"
आशीष गोयल, याचिकाकर्ता, मंदिर पक्ष:
"शिलालेख स्पष्ट रूप से दिखाता है कि प्राचीन मंदिर को नष्ट कर मूर्तियों को हटाया गया और मस्जिद में परिवर्तित किया गया। यह भोजशाला को सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर साबित करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य है।"
अब्दुल समद, कमाल मौलाना वेलफेयर कमेटी, धार:
"1903 और 1904 के एएसआई सर्वे में इसे मस्जिद ही माना गया था। नए सर्वे में तथ्य बदल गए हैं। हम कोर्ट में आपत्तियां दर्ज कराएंगे।"
लंदन में वाग्देवी की प्रतिमा
इस बीच, लंदन के म्यूजियम में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति को भारत वापस लाने का मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठाया गया। विधायक प्रताप ग्रेवाल ने पूछताछ की कि प्रतिमा को वापस लाने के लिए क्या प्रयास किए गए। संस्कृति विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने लिखित जवाब में बताया कि पत्राचार जारी है। यह प्रतिमा 1930 में अंग्रेजों द्वारा लंदन ले जाई गई थी और अब भी वहीं रखी है।
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