इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ भोजशाला का वसंतोत्सव, पूजा और नमाज शांतिपूर्ण संपन्न

धार। शुक्रवार को धार की भोजशाला में वसंत पंचमी का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे, ताकि पूजा और नमाज दोनों बिना किसी विघ्न के संपन्न हो सकें। तय संख्या में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने दोपहर 2 बजे नमाज अदा की, जबकि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की पूजा और हवन चलता रहा।
इस बार किसी भी प्रकार का विवाद नहीं हुआ। पिछले वर्षों में जब वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती थी, तो शहर में तनाव की स्थिति बनी थी। इस बार प्रशासन ने सुरक्षा में पूरी सतर्कता बरती और धारवासियों ने भी संयम दिखाया। पूजा के बाद हवन पूर्ण किया गया और स्थानीय लोगों ने चैन की सांस ली।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता
धार शहर पुलिस ने शहर को छावनी में तब्दील कर दिया था। भोजशाला के भीतर और बाहर दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। आसमान में ड्रोन निगरानी कर रहे थे और हर रास्ते पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। आरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों ने बाहर के प्रवेश पर कड़ी निगरानी रखी। प्रशासन ने भोजशाला को छह अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा सुनिश्चित की।
मस्जिद में नमाज पढ़ाने के लिए मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को वज्र वाहन में लाया गया। सुरक्षा के तहत 15 से अधिक लोग शामिल हुए और 20 मिनट तक नमाज अदा की गई।
भक्तों की भीड़ और आयोजन की झलकियां
हजारों श्रद्धालुओं ने निर्विघ्न पूजा और दर्शन किए। भोजशाला में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी उपस्थित थे, सभी नंगे पैर पूजा के लिए पहुंचे। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर भी दर्शन के लिए आईं।
भक्तों के लिए स्थानीय सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने भोजन और जलपान के स्टॉल लगाए, जहां पूड़ी-आलू, पोहा और चाय वितरित की गई। शोभायात्रा भी बड़ी संख्या में निकाली गई, जिसमें भगवा पताके, डीजे गाड़ियां और युवा उत्साहित होकर नारे लगा रहे थे।
भोजशाला की मस्जिद वाले हिस्से और छतों पर सफेद टेंट लगाकर विशेष व्यवस्था की गई थी। दोपहर ढाई बजे तक दर्शन के लिए कतारें समाप्त हो गई और लोगों को आसानी से प्रवेश मिला।
कुछ आरोप भी उठे
हालांकि, एक पक्ष ने दावा किया कि उन्हें और उनके साथियों को नमाज पढ़ने में रोक दिया गया। उनका कहना था कि डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी ने उन्हें पिछले 16 घंटे तक कमाल मौला मस्जिद में रोका, लेकिन उन्हें दोपहर 2 बजे तक नमाज पढ़ने का अवसर नहीं मिला।
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