ई-20 पेट्रोल विवाद के बीच सरकार दे सकती है बिना इथेनोल वाले पेट्रोल का विकल्प

HIGHLIGHTS
- ई-20 पेट्रोल को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार बिना इथेनोल वाले सामान्य पेट्रोल का विकल्प देने पर विचार कर रही है।
- नए ईंधन विकल्प के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसर, स्टोरेज और सप्लाई व्यवस्था की जरूरत होगी, जबकि कीमत तय करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
- सरकार ई-20 को विदेशी मुद्रा बचत और किसानों के फायदे से जोड़ रही है, लेकिन उपभोक्ता माइलेज में कमी और इंजन संबंधी चिंताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
नई दिल्ली। इथेनोल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्र सरकार अब पेट्रोल पंपों पर बिना इथेनोल वाला सामान्य पेट्रोल उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के बीच चर्चा जारी है।
सरकार ने इस संबंध में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) से भी सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, योजना को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती पेट्रोल की कीमत तय करना और पेट्रोल पंपों पर अलग व्यवस्था तैयार करना होगी।
अलग डिस्पेंसर और स्टोरेज की होगी जरूरत
फिलहाल देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ई-20 पेट्रोल और प्रीमियम श्रेणी के ईंधन उपलब्ध हैं। अगर बिना इथेनोल वाला पेट्रोल शुरू किया जाता है तो इसके लिए अलग डिस्पेंसर, स्टोरेज टैंक और सप्लाई व्यवस्था तैयार करनी होगी। इससे तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि यह तय करना भी जरूरी होगा कि बिना इथेनोल वाले पेट्रोल की कीमत क्या रखी जाए।
कीमत निर्धारण बना सबसे बड़ा मुद्दा
एक अधिकारी के अनुसार, सरकार के सामने मुख्य सवाल यह है कि नए पेट्रोल विकल्प की कीमत कैसे तय की जाए। क्या बिना इथेनोल वाले पेट्रोल को पूरी लागत के आधार पर बेचा जाए या ई-20 पेट्रोल की कीमत में कोई अंतर रखा जाए, इस पर विचार किया जा रहा है।
तेल कंपनियों का मानना है कि नया ईंधन विकल्प जोड़ने से सप्लाई चेन, स्टॉक प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ेगा।
ई-20 पेट्रोल को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
देश में वर्तमान में 20 प्रतिशत इथेनोल और 80 प्रतिशत पेट्रोल वाले ई-20 ईंधन की बिक्री हो रही है। सरकार के अनुसार, इथेनोल मिश्रण बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों को लाभ और प्रदूषण में कमी जैसे फायदे हुए हैं।
हालांकि, कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने, पुराने वाहनों में इंजन से जुड़ी चिंताओं और ईंधन विकल्प सीमित होने की शिकायतें की हैं। कुछ रिपोर्ट्स में वाहन निर्माताओं की ओर से माइलेज में गिरावट की संभावना भी जताई गई है।
ई-25 या ज्यादा मिश्रण वाले पेट्रोल पर अभी स्थिति साफ नहीं
सरकार ने भविष्य में ज्यादा इथेनोल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन फिलहाल ई-25 जैसे ईंधनों की व्यापक बिक्री शुरू होने की संभावना नहीं है। सरकार और तेल कंपनियां मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर रही हैं।
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