रांची में गैस सिलिंडर की किल्लत पर उपभोक्ताओं का प्रदर्शन, सड़क जाम

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के चुटिया स्थित महादेव मंडा परिसर के बाहर शुक्रवार को गैस सिलिंडर की कमी को लेकर भारी विरोध देखने को मिला। गुरुवार रात से लाइन में खड़े उपभोक्ताओं को शुक्रवार दोपहर तक सिलिंडर नहीं मिलने पर लोग सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
आक्रोशित लोग दोपहर लगभग 12 बजे से 2 बजे तक मुख्य सड़क पर सिलिंडर रखकर जाम कर दिया, जिससे इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
डीएसी नंबर और लंबी कतारों को लेकर नाराजगी
उपभोक्ताओं ने बताया कि वे गुरुवार की रात से ही खाली सिलिंडर लेकर लाइन में खड़े हैं, लेकिन दोपहर तक उन्हें गैस नहीं मिली। प्रदर्शनकारी इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के खिलाफ नारों के साथ अपनी शिकायतें दर्ज कराते रहे। उनका आरोप था कि पहले 25 दिनों तक बुकिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है, फिर डीएसी नंबर के लिए लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। डीएसी नंबर मिलने के बाद भी सिलिंडर तक पहुंचने में कई दिनों का समय लग जाता है।
कुछ उपभोक्ता पिछले 4-5 दिनों से शास्त्री मैदान, बेलबगान, अमरावती कॉलोनी, गोसाईं टोली और महादेव मंडा में रातभर लाइन लगाकर सिलिंडर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
सड़क पर भिड़े राहगीर और प्रदर्शनकारी
सड़क जाम के दौरान वहां से गुजर रहे राहगीरों और प्रदर्शनकारी उपभोक्ताओं के बीच बहस हुई, कुछ स्थानों पर हाथापाई तक की स्थिति बन गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बावजूद काफी समय तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
ब्लैक मार्केटिंग और प्रशासन पर सवाल
प्रदर्शनकारी उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि शहर में सिलिंडर की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। उनका कहना है कि कुछ सिलिंडर 3000 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल रही। उपभोक्ताओं का कहना है कि घरेलू सिलिंडर फास्ट-फूड दुकानों और व्यावसायिक उपयोग में चला जा रहा है, लेकिन प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
प्रशासन से मांग
आक्रोशित लोगों ने जिला प्रशासन से सिलिंडर वितरण प्रणाली में सुधार करने, कालाबाजारी रोकने और आम लोगों को समय पर गैस उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे भविष्य में और सख्त आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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