दिल्ली में बढ़ा हीट इंडेक्स का खतरा, 37°C पर भी 54°C जैसी गर्मी का एहसास

नई दिल्ली। राजधानी में गर्मी की तीव्रता को अब केवल अधिकतम तापमान के आधार पर नहीं आंका जा सकता। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हीट इंडेक्स यानी "महसूस होने वाला तापमान" लोगों के स्वास्थ्य के लिए अधिक महत्वपूर्ण संकेतक बन सकता है। इसकी प्रमुख वजह हवा में बढ़ती नमी है, जो वास्तविक तापमान की तुलना में कहीं अधिक गर्मी का एहसास कराती है।
दिल्ली में जून और जुलाई के दौरान आर्द्रता का स्तर सामान्यतः बढ़ जाता है। नमी बढ़ने से शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता, जिसके कारण शरीर को ठंडा रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और गर्मी अधिक महसूस होती है। यही कारण है कि कई बार थर्मामीटर पर दर्ज तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद लोगों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है।
37 डिग्री तापमान, लेकिन एहसास 54 डिग्री का
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 5 जुलाई 2025 को दिल्ली में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन हीट इंडेक्स 54 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसी प्रकार 22 मई 2024 को वास्तविक तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस था, जबकि महसूस होने वाला तापमान 55.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
इस वर्ष भी जून के अंतिम सप्ताह में हालात चिंताजनक रहे। पिछले तीन दिनों के दौरान हीट इंडेक्स लगातार 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। 27 जून को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन महसूस होने वाला तापमान 51.3 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं 28 जून को 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद लोगों ने 50.7 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी महसूस की।
गर्मी को समझने के चार महत्वपूर्ण पैमाने
1. ड्राई बल्ब तापमान
यह वह वास्तविक तापमान है जिसे सामान्य थर्मामीटर मापता है। इसमें हवा की नमी का कोई प्रभाव शामिल नहीं होता।
2. हीट इंडेक्स
तापमान और आर्द्रता के संयुक्त प्रभाव से तैयार किया गया पैमाना, जो बताता है कि इंसान को वास्तव में कितनी गर्मी महसूस हो रही है।
3. वेट बल्ब तापमान
यह वाष्पीकरण के आधार पर प्राप्त न्यूनतम तापमान को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि शरीर पसीने के माध्यम से खुद को कितना ठंडा रख सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस वेट बल्ब तापमान मानव सहनशीलता की ऊपरी सीमा माना जाता है।
4. हीटवेव
जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य स्तर से काफी अधिक हो जाए, तब उसे हीटवेव की स्थिति माना जाता है। इसके मानक अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी और उच्च हीट इंडेक्स कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। इनमें शरीर में पानी की कमी, त्वचा संबंधी परेशानियां, प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी, मानसिक तनाव, शरीर में सूजन, अत्यधिक पसीना और हृदय तथा किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव शामिल हैं।
दिल्ली में हीटवेव कब मानी जाती है?
मैदानी क्षेत्रों और दिल्ली के लिए हीटवेव की स्थिति तब मानी जाती है जब:
- अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो।
- तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री अधिक हो और 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए।
गंभीर हीटवेव की स्थिति
- तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री या उससे अधिक बढ़ जाए।
- अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाए।
बचाव के लिए क्या करें?
- प्यास न लगने पर भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
- ओआरएस, नींबू पानी, छाछ और हल्का नमक मिला फलों का रस लें।
- मौसमी फल और सब्जियों को भोजन में शामिल करें।
- ढीले और सूती कपड़े पहनें, हल्के रंगों को प्राथमिकता दें।
- बाहर निकलते समय सिर को टोपी, स्कार्फ या छाते से ढकें।
- अधिकतम समय छायादार स्थानों में बिताएं।
- शरीर को ठंडा रखने के लिए नियमित रूप से स्नान करें।
किन बातों से बचें?
- दोपहर के सबसे गर्म समय में सीधे धूप में जाने से बचें।
- नंगे पैर बाहर न निकलें।
- अत्यधिक चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन कम करें।
- बच्चों और पालतू जानवरों को बंद या खड़ी गाड़ियों में न छोड़ें।
- खुले में बिकने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थ खाने से बचें।
हाल के वर्षों के सबसे चिंताजनक उदाहरण
| तारीख | वास्तविक तापमान | महसूस होने वाला तापमान |
|---|---|---|
| 5 जुलाई 2025 | 37.1°C | 54°C |
| 22 मई 2024 | 43.4°C | 55.4°C |
भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक अखिल श्रीवास्तव के अनुसार, हीट इंडेक्स दिनभर तापमान और नमी के स्तर में बदलाव के साथ बदलता रहता है। इसका आकलन आमतौर पर दिन के सबसे गर्म समय में किया जाता है। हालांकि यह केवल एक अनुमानित पैमाना है, क्योंकि किसी व्यक्ति को कितनी गर्मी महसूस होगी, यह उसकी शारीरिक गतिविधि, पसीना आने की क्षमता और धूप के संपर्क जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बढ़ती आर्द्रता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण केवल तापमान नहीं, बल्कि हीट इंडेक्स भी गर्मी के खतरे को समझने का प्रमुख आधार बन सकता है।
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