बिहार चुनाव में पैसों के दुरुपयोग और नशे पर चुनाव आयोग सख्त, तैनात किए व्यय पर्यवेक्षक

बिहार विधानसभा चुनाव और सात अन्य राज्यों की आठ उपचुनाव सीटों को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ी निगरानी का ऐलान किया है। आयोग ने उम्मीदवारों के चुनावी खर्च, धनबल और मतदाताओं को प्रभावित करने वाले प्रलोभनों पर रोक लगाने के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। ये पर्यवेक्षक चुनाव के दौरान पैसों के दुरुपयोग और किसी भी अनियमितता पर कड़ी नजर रखेंगे।
चुनाव आयोग ने दो चरणों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और आठ उपचुनावों के लिए सभी प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य न केवल चुनावी खर्च की निगरानी करना है, बल्कि नशीले पदार्थों, शराब और मुफ्तखोरी जैसी गतिविधियों पर भी अंकुश लगाना है। आयोग के अनुसार, व्यय पर्यवेक्षक पहले ही अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं और चुनाव की अधिसूचना के दिन से निगरानी कार्य शुरू कर दिया है।
चुनाव आयोग ने बताया कि अब तक विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों ने चुनाव की घोषणा के बाद तीन दिनों में 33.97 करोड़ रुपए की नकदी, शराब, ड्रग्स और मुफ्त वितरण की गई वस्तुएं जब्त की हैं। आयोग का कहना है कि उड़न दस्ते, निगरानी दल और वीडियो निगरानी टीमें 24 घंटे सतर्क रहकर किसी भी संदिग्ध मामले की जानकारी चुनाव प्राधिकारी तक पहुंचाएंगी।
एनडीए ने किया सीट बंटवारा
इसी बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों के लिए सीटों का बंटवारा कर दिया है। भाजपा और जेडीयू 101-101 सीटों पर, लोजपा (रामविलास) 29 सीटों पर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा छह सीटों पर और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) छह सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।
बिहार चुनाव में एनडीए को तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक, कांग्रेस, सीपीआई (एमएल), सीपीआई, सीपीएम और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) का मुकाबला मिलेगा। इस बार चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी नए खिलाड़ी के रूप में सामने आ रही है, जो राजनीतिक समीकरणों में नई हलचल पैदा कर सकती है।
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