श्रीलंका में ईंधन संकट गहराया, पेट्रोल 398 और डीजल 382 रुपये प्रति लीटर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच श्रीलंका सरकार ने ईंधन के दामों में करीब 25 प्रतिशत तक की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
सरकार ने नई दरें आधी रात से लागू कर दीं। गौर करने वाली बात यह है कि एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी और 1 मार्च के बाद तीसरी बार कीमतें बढ़ाई गई हैं। इस वृद्धि के बाद पेट्रोल, डीजल और केरोसीन सभी महंगे हो गए हैं, जिसका असर सीधे तौर पर आम जनता, परिवहन सेवाओं और उद्योगों पर पड़ने की आशंका है।
नई दरों के मुताबिक ऑटो डीजल की कीमत 303 से बढ़कर 382 श्रीलंकाई रुपये प्रति लीटर हो गई, यानी लगभग 79 रुपये की बढ़ोतरी। सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। पेट्रोल 92 ऑक्टेन अब 317 की जगह 398 रुपये और पेट्रोल 95 ऑक्टेन 365 से बढ़कर 455 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, केरोसीन के दाम भी 195 से बढ़कर 255 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं।
कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई के बाद ईरान की प्रतिक्रिया से खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और गंभीर हो गई है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, वहां अस्थिरता के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
ईंधन महंगा होने का सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि किराए में बढ़ोतरी नहीं हुई तो बड़ी संख्या में बसें बंद करनी पड़ सकती हैं। उन्होंने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग रखी है। वहीं, ऑटो और थ्री-व्हीलर चालकों ने भी किराए बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि वह अब भी ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है और हर महीने इस पर बड़ा खर्च कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक अगर कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो देश पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से महंगाई दर में 5 से 8 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है, जिससे श्रीलंका की आर्थिक स्थिति पर फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
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