जैसलमेर: बिजली कटौती से 300 परिवार परेशान, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

HIGHLIGHTS
- राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले के छतागढ़ गांव में भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली संकट ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है।
- पिछले सात दिनों से गांव में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे करीब 300 परिवारों का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
- स्थानीय लोगों के अनुसार मुख्य बिजली केबल खराब होने के कारण पूरे गांव में अंधेरा पसरा हुआ है और गर्मी में हालात बेहद खराब हो गए हैं।
- दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के बीच लोगों को बिना बिजली के जीवन गुजारना पड़ रहा है।
- ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलें लगा…
राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले के छतागढ़ गांव में भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली संकट ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले सात दिनों से गांव में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे करीब 300 परिवारों का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मुख्य बिजली केबल खराब होने के कारण पूरे गांव में अंधेरा पसरा हुआ है और गर्मी में हालात बेहद खराब हो गए हैं। दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के बीच लोगों को बिना बिजली के जीवन गुजारना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलें
लगातार बिजली गुल रहने से गांव में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। बिजली से चलने वाली मोटरें बंद होने के कारण ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है।
भीषण गर्मी में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवार रातें खुले में या बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजारने को मजबूर हैं।
प्रशासन और डिस्कॉम पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि डिस्कॉम अधिकारी केवल कागजों में सुधार दिखा रहे हैं, जबकि जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि जर्जर मुख्य केबल की समय पर मरम्मत या बदलाव नहीं किया गया, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था चरमरा गई है।
तत्काल समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खराब केबल को तुरंत बदला जाए और गांव में नियमित बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की लगातार अनदेखी उनके जीवन को और कठिन बना रही है।
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