नालंदा की ‘ड्रोन दीदी’: सुरभी कुमारी ने खेती को दिया हाईटेक टच

HIGHLIGHTS
- बदलते दौर में महिलाएं अब केवल घर-गृहस्थी या पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि तकनीक की मदद से कृषि क्षेत्र में नई पहचान भी बना रही हैं।
- नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड के नीरपुर गांव की सुरभी कुमारी ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने ड्रोन तकनीक को अपनाकर खेती के काम को एक नया आयाम दिया है।
- सुरभी जब रिमोट के जरिए आसमान में उड़ते बड़े कृषि ड्रोन से खेतों में कीटनाशक और तरल खाद का छिड़काव करती हैं, तो यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
- उनकी इस दक्षता औ…
बिहारशरीफ। बदलते दौर में महिलाएं अब केवल घर-गृहस्थी या पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि तकनीक की मदद से कृषि क्षेत्र में नई पहचान भी बना रही हैं। नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड के नीरपुर गांव की सुरभी कुमारी ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने ड्रोन तकनीक को अपनाकर खेती के काम को एक नया आयाम दिया है।
सुरभी जब रिमोट के जरिए आसमान में उड़ते बड़े कृषि ड्रोन से खेतों में कीटनाशक और तरल खाद का छिड़काव करती हैं, तो यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। उनकी इस दक्षता और मेहनत के कारण ग्रामीण उन्हें सम्मान से ‘ड्रोन दीदी’ कहकर पुकारते हैं। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
सुरभी बताती हैं कि उनका हमेशा से ही खेती में कुछ नया करने का मन था। इस सोच के चलते उन्होंने करीब दो साल पहले हैदराबाद जाकर ड्रोन संचालन और कृषि उपयोग की औपचारिक ट्रेनिंग ली। शुरुआती दौर में थोड़ी झिझक जरूर थी, लेकिन परिवार, खासकर पति के सहयोग ने उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद केंद्र सरकार की योजना के तहत उन्हें अनुदान पर कृषि ड्रोन भी प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू कर दिया।
वर्तमान में सुरभी पूरी तरह से आधुनिक कृषि सेवाएं दे रही हैं। वे मोबाइल के माध्यम से किसानों से संपर्क कर ड्रोन छिड़काव की बुकिंग लेती हैं। एक बीघा खेत में छिड़काव के लिए वे लगभग 300 रुपये शुल्क लेती हैं, जबकि दवा की व्यवस्था किसान स्वयं करता है। उनकी तेजी और सटीक सेवा के कारण वे खरीफ सीजन में लगभग 600 बीघा और रबी सीजन में करीब 300 बीघा खेतों में ड्रोन से छिड़काव कर लेती हैं।
सिर्फ ड्रोन सेवाओं तक ही सीमित न रहते हुए सुरभी ने अपनी आय बढ़ाने के लिए गांव में खाद-बीज की दुकान भी शुरू की है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है और परिवार की जरूरतें पहले की तुलना में आसानी से पूरी हो रही हैं। उनकी इस सफलता का सबसे बड़ा लाभ उनके बच्चों को मिल रहा है, जो बेहतर स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवार रहे हैं।
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