बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद को बड़ा झटका, दो और विधायकों ने दिया इस्तीफा

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को लगातार झटके लग रहे हैं। पार्टी के दो और विधायकों — नवादा से विभा देवी और रजौली (सुरक्षित) से प्रकाश वीर — ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। हाल ही में विधायक संगीता कुमारी, भरत बिंद और चेतन आनंद भी इस्तीफा दे चुके हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही दोनों विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। उनकी नाराजगी उस समय और स्पष्ट हो गई, जब अगस्त में वे गया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के मंच पर नजर आए। उसी वक्त उनके एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। माना जा रहा है कि दोनों नेता जल्द ही औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।
टिकट वितरण और अंदरूनी खींचतान से असंतोष
विभा देवी, पूर्व मंत्री और तीन बार के विधायक रह चुके राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में नवादा से राजद के टिकट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2025 के लोकसभा चुनाव में जब पार्टी ने श्रवण कुशवाहा को टिकट दिया, तो वह और उनके समर्थक असंतुष्ट हो गए। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि उन्होंने राजद प्रत्याशी के समर्थन में पूरी तरह काम नहीं किया, जिससे तेजस्वी यादव उनसे नाराज हो गए।
विभा देवी का कहना है कि पार्टी में उनके और उनके परिवार की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं ने सरकार गठन के दौरान उनसे धन की मांग की थी, जिसे वह पूरा नहीं कर सकीं। “मैंने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया और न ही अपने सम्मान के साथ समझौता किया,” उन्होंने कहा।
प्रकाश वीर के बीजेपी में जाने की चर्चा तेज
रजौली (सुरक्षित) सीट से विधायक प्रकाश वीर दलित समुदाय से आते हैं और 2015 में पहली बार विधायक बने थे। हालांकि, हाल के महीनों में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ता गया था। अगस्त में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें राजद कार्यकर्ता ‘तेजस्वी भैया, प्रकाश वीर को हटाना होगा’ के नारे लगा रहे थे। इसके बाद से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।
2020 में दोनों विधायकों ने दिलाई थी राजद को जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में नवादा से विभा देवी और रजौली से प्रकाश वीर ने एनडीए को हराकर जीत दर्ज की थी। इन दोनों सीटों पर राजद को दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक मतदाताओं का मजबूत समर्थन मिला था, जिससे मगध क्षेत्र में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई थी। अब दोनों विधायकों के इस्तीफे से राजद के लिए इस क्षेत्र में समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है।
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