TMC के 440 करोड़ रुपये पर विवाद: बैंक खातों के नियंत्रण को लेकर ममता गुट पहुंचा हाईकोर्ट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ संगठनात्मक विवाद अब पार्टी के वित्तीय ढांचे तक पहुंच गया है। पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के संचालन और नियंत्रण को लेकर उठा विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर तत्काल सुनवाई की मांग की है।
ममता गुट की जल्द सुनवाई की अपील
सोमवार को मामले का उल्लेख न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की त्वरित सुनवाई का आग्रह किया। हालांकि अदालत ने कहा कि सुनवाई से पहले पुलिस, संबंधित बैंक और राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी करना आवश्यक है। इसके बाद ही सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि नोटिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस पर सोमवार या मंगलवार को विचार किया जा सकता है।
पार्टी फंड पर दो गुटों का दावा
सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मतभेद और गहरे हो गए हैं। एक ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट खुद को वास्तविक संगठन का प्रतिनिधि बता रहा है, वहीं ममता बनर्जी का खेमे ने पार्टी के संगठन और वित्तीय नियंत्रण पर अपना अधिकार जताया है।
इसी खींचतान के बीच पार्टी के बैंक खातों के संचालन को लेकर भी विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने बैंक को पत्र भेजकर खातों के संचालन पर आपत्ति जताई थी।
बैंक खातों पर रोक और पुलिस कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद दूसरे गुट की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि पार्टी के तीनों खातों से किसी भी प्रकार का लेन-देन फिलहाल रोक दिया जाए। साथ ही बैंक से संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी गुट ने हाईकोर्ट का रुख किया है। जानकारी के मुताबिक, इन खातों में कुल लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं, जिनमें से करीब 260 करोड़ रुपये मुख्य पार्टी खाते में और शेष राशि गोवा व त्रिपुरा इकाइयों के खातों में है।
अदालत के फैसले पर टिकी नजरें
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि पार्टी खातों के संचालन का वैध अधिकार किसके पास है और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई कितनी कानूनी रूप से सही है। हाईकोर्ट के आगामी निर्णय से पार्टी फंड और उसके नियंत्रण को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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