ओडिशा में समुद्री कटाव का कहर, गंजाम के 17 गांवों पर मंडराया अस्तित्व का संकट

HIGHLIGHTS
- ओडिशा के गंजाम जिले में समुद्री कटाव ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
- लगातार बढ़ते समुद्र के प्रभाव से गंजाम ब्लॉक के पोड़मपेटा गांव सहित दो ग्राम पंचायतों के कुल 17 गांवों पर संकट गहराता जा रहा है।
- शुक्रवार को एक पक्का मकान समुद्र में समा जाने की घटना ने स्थिति की भयावहता को और बढ़ा दिया।
- स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ साल पहले तक समुद्र की दूरी गांव से लगभग एक किलोमीटर थी, लेकिन तेजी से हो रहे कटाव ने उसे अब बस्तियों तक पहुंचा दिया है।
भुवनेश्वर। ओडिशा के गंजाम जिले में समुद्री कटाव ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लगातार बढ़ते समुद्र के प्रभाव से गंजाम ब्लॉक के पोड़मपेटा गांव सहित दो ग्राम पंचायतों के कुल 17 गांवों पर संकट गहराता जा रहा है। शुक्रवार को एक पक्का मकान समुद्र में समा जाने की घटना ने स्थिति की भयावहता को और बढ़ा दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ साल पहले तक समुद्र की दूरी गांव से लगभग एक किलोमीटर थी, लेकिन तेजी से हो रहे कटाव ने उसे अब बस्तियों तक पहुंचा दिया है। पोड़मपेटा गांव का बड़ा हिस्सा पहले ही समुद्र में विलीन हो चुका है और जो क्षेत्र बचा है, वहां भी खतरा लगातार बढ़ रहा है। कभी करीब 500 घरों वाले इस गांव में अब गिने-चुने मकान ही बचे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि समुद्र हर दिन धीरे-धीरे जमीन को निगलता जा रहा है। प्रभावित इलाकों से कई परिवार पहले ही पलायन कर चुके हैं, जबकि बचे हुए लोग भी अनिश्चित भविष्य के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, पालिबंधा ग्राम पंचायत के नौ और रामगड़ा ग्राम पंचायत के आठ गांव समुद्री कटाव की चपेट में हैं। हजारों लोगों के सामने अब विस्थापन का खतरा खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से तटीय सुरक्षा के लिए मजबूत दीवार, बोल्डर पैकिंग और अन्य स्थायी उपायों की मांग की है।
वहीं प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और चुनाव बहिष्कार जैसे कदम भी उठा सकते हैं।
इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए छत्रपुर विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज और स्थायी तटीय सुरक्षा परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में कई गांव पूरी तरह नक्शे से गायब हो सकते हैं।
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