व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक, यूक्रेन को मिसाइल देने पर नहीं बनी सहमति

वॉशिंगटन: रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी संघर्ष में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक मुद्दों पर बातचीत की। हालांकि, जेलेंस्की की सबसे बड़ी उम्मीद अमेरिका से लंबी दूरी की टोमहॉक क्रूज मिसाइलें मिलने की, फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री साइबिहा ने कहा कि केवल टोमहॉक मिसाइलों के मुद्दे पर चर्चा ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वार्ता के लिए मजबूर कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ताकत के जरिए ही शांति की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। साइबिहा ने बताया कि जेलेंस्की अमेरिका के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए नई योजना लेकर आए हैं। इसमें अमेरिकी कंपनियों को यूक्रेन की तरलीकृत प्राकृतिक गैस भंडारण सुविधाओं में निवेश करने की पेशकश शामिल है, जिससे अमेरिका यूरोप के ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर सके।
ट्रंप ने संकेत दिए कि वह जल्द ही हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में पुतिन से फिर मुलाकात करेंगे। इसके अलावा अगले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी अधिकारियों की बैठक भी होने वाली है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच सीधी बातचीत मुश्किल है और शायद दोनों पक्षों को अलग-अलग बातचीत करनी पड़े।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन की चेतावनी के बाद ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वे यूक्रेन को टोमहॉक मिसाइलें नहीं देंगे। उन्होंने कहा, "हमारे पास पर्याप्त टोमहॉक मिसाइलें हैं, लेकिन हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए उन्हें सुरक्षित रखना होगा। हम अपनी सैन्य ताकत खाली नहीं कर सकते।"
टोमहॉक मिसाइलें लगभग 1,600 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। जेलेंस्की का मानना है कि इन मिसाइलों से यूक्रेन रूसी ठिकानों और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकेगा, जिससे पुतिन को शांति वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके।
बैठक के बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका यूक्रेन को ये मिसाइलें देता है, तो इससे अमेरिका-रूस संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। उनके विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि इससे युद्ध की स्थिति शायद नहीं बदलेगी, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ेगा।
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