हर साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पवित्र त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह दिन था जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी को है और इसे खास बनाते हैं कुछ दुर्लभ ग्रह संयोग, जो इस दिन और रात में देखने को मिलेंगे। ऐसे में रात भर जागकर साधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
चार पहरों में पूजा का विधान
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को चार पहरों में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। ज्योतिष विशेषज्ञों और पुंडरीक महाराज के अनुसार, इस बार सूर्य, बुध और शुक्र एक विशेष स्थिति में रहेंगे, जिससे त्रिग्रही योग बन रहा है। इसके अलावा, श्रवण नक्षत्र, व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग और राजयोग जैसे शुभ योग भी महाशिवरात्रि को विशेष बना रहे हैं। यह दुर्लभ योग लगभग 300 वर्षों में पहली बार बन रहे हैं।
सबसे शुभ साधना मुहूर्त
यदि रातभर जागकर साधना करना संभव न हो, तो 12:09 बजे रात से 1:00 बजे तक का 45 मिनट का मुहूर्त सबसे लाभदायक माना गया है। इस समय पूजा और साधना करने से विशेष ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। पुंडरीक महाराज ने कहा कि इस रात उर्जा का प्रवाह अधिक ऊर्ध्वगमनशील रहेगा, इसलिए संभव हो तो पूरे समय जागकर भगवान शिव की उपासना अवश्य करें।
महाशिवरात्रि का यह पर्व शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन व्रत, पूजा और साधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और महाभारत कथा की जानकारियों पर आधारित है. दैनिक देहात इसकी पुष्टि नहीं करता है.