महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में धर्मांतरण को जबरन या धोखे से कराने पर रोक लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया। नए प्रस्तावित कानून के तहत, लालच, दबाव, धोखाधड़ी या धमकी के जरिए धर्म परिवर्तन कराने पर सात साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
राज्य के गृह राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने विधानसभा में यह विधेयक पेश किया। इसके अनुसार, जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है या धर्मांतरण समारोह आयोजित कर रहा है, उसे 60 दिन पहले प्रशासन को सूचित करना अनिवार्य होगा।
यदि किसी धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है, तो सबूत पेश करने की जिम्मेदारी आरोपी पर होगी, कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ। पीड़ित महिला, नाबालिग, मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति या अनुसूचित जाति/जनजाति के मामले में ज्यादा कठोर दंड: 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि दोहरे अपराध की स्थिति में दंड और जुर्माना बढ़कर 10 साल और 10 लाख रुपये हो सकता है। अगर ऐसे विवाह से बच्चे का जन्म होता है, तो उसके धर्म का निर्धारण मां के धर्म के आधार पर किया जाएगा। अवैध तरीके से धर्मांतरण किए जाने की स्थिति में पीड़ित या उसके परिवार के सदस्य पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, और पुलिस के लिए शिकायत दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सरकार का दावा है कि राज्य में लालच, धोखे या विवाह के बहाने धर्मांतरण की शिकायतें बढ़ रही हैं। हिंदू संगठनों ने लंबे समय से ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानून की मांग की थी। राज्य सरकार ने पुलिस और संबंधित विभागों की समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक तैयार किया।
हालांकि, सपा विधायक अबु आसिम आजमी ने इस विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कानून एक धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।