अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2022 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं की आशंका ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ रहा है। ईरानी बंदरगाहों और निर्यात पर प्रतिबंध जैसी स्थितियों ने आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसी कारण निवेशक जोखिम से बचते हुए तेल की कीमतों को ऊपर धकेल रहे हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव बना मुख्य वजह
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस पहल को स्वीकार नहीं किया है जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई थी। उनका कहना है कि जब तक कोई व्यापक परमाणु समझौता नहीं होता, प्रतिबंध जारी रहेंगे। स्थिति को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने तेल कंपनियों के साथ भी बैठकें की हैं ताकि संभावित आपूर्ति संकट का सामना किया जा सके।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए सख्त संदेश भी साझा किया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
तेल बाजार में लगातार तेजी
वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार:
- ब्रेंट क्रूड जून अनुबंध 1.91 डॉलर बढ़कर 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया
- जुलाई अनुबंध 111.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है
- WTI क्रूड भी 107.51 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया है
यह लगातार कई सत्रों से जारी तेजी का संकेत है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इस तेजी का सीधा असर देखने को मिल रहा है, जहां ईंधन आयात लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
आपूर्ति संकट और वैश्विक हलचल
स्थिति तब और जटिल हो गई जब ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के चलते समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी बाधाओं ने वैश्विक तेल परिवहन को प्रभावित किया है।
इसके अलावा, ओपेक+ समूह में भी बदलाव की खबरों ने बाजार को प्रभावित किया है। यूएई के संगठन से अलग होने की अटकलों और उत्पादन कोटा में संभावित बदलाव की चर्चा से भी निवेशकों में अस्थिरता बढ़ी है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। आपूर्ति बाधाओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।