भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इससे पहले ही भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। 1 जनवरी 2026 से EU ने ‘जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज’ (GSP) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट को निलंबित कर दिया है। इसके चलते यूरोप जाने वाले लगभग 87% भारतीय उत्पादों पर अब उच्च इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी, जिससे वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की संभावना है।
GSP का निलंबन: क्या है मामला?
GSP का उद्देश्य विकासशील देशों को यूरोप में कम टैक्स पर सामान बेचने का अवसर देना है। लेकिन EU के ‘ग्रेजुएशन रूल’ के तहत, जब किसी देश के निर्यात एक निश्चित सीमा से ऊपर पहुंच जाता है, तो यह छूट बंद कर दी जाती है। इसी नियम के तहत भारत के अधिकांश उत्पाद अब इस लाभ से वंचित हो गए हैं। केवल 13% उत्पाद, जिनमें मुख्य रूप से कृषि और चमड़ा क्षेत्र शामिल हैं, ही अब भी GSP लाभ के तहत रहेंगे।
निर्यातकों पर असर
इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव टेक्सटाइल, प्लास्टिक, रसायन, मशीनरी और जेम्स व ज्वैलरी उद्योग पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, पहले जिस कपड़े पर 9.6% ड्यूटी लगती थी, अब उस पर 12% ड्यूटी लागू होगी। मिनरल्स, केमिकल्स, रबर, पत्थर, सिरेमिक, कीमती धातुएं, लोहा, स्टील और इलेक्ट्रिकल गुड्स जैसे औद्योगिक उत्पाद भी अब पूरी तरह से ड्यूटी के दायरे में आ गए हैं। FIEO के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार, भारतीय निर्यातकों को पहले औसतन 20% टैक्स लाभ मिलता था, जो अब खत्म हो गया है।
बांग्लादेश और वियतनाम से प्रतिस्पर्धा का खतरा
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को अभी भी यूरोप में कम या शून्य ड्यूटी का लाभ प्राप्त है। भारत के उत्पाद महंगे होने से यूरोपीय खरीदार इन देशों की ओर रुख कर सकते हैं, खासकर कपड़ों जैसे प्राइस-सेंसिटिव सेक्टर में।
FTA से पहले चुनौती और अतिरिक्त लागत
यह निलंबन उस समय आया है जब भारत और EU 27 जनवरी को FTA वार्ता पूरी करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, FTA लागू होने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। तब तक भारतीय निर्यातकों को उच्च ड्यूटी और EU के नए कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) टैक्स जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसके साथ 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। GSP लाभ खत्म होने से भारतीय निर्यात कमजोर प्रतिस्पर्धा और बढ़ी लागत के दबाव में आ गया है।