नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके बावजूद भारत के लिए राहत की बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल यह महंगाई पर बड़ा असर नहीं डालेगा।

कच्चे तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं?

28 फरवरी 2026 तक भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें $69.01 प्रति बैरल थीं। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद कीमतें 2 मार्च तक $80.16 प्रति बैरल पहुंच गईं। 9 मार्च को वैश्विक स्तर पर कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक चली गईं। एक बैरल में करीब 159 लीटर तेल होता है। इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 53 पैसे कमजोर होकर 92.35 रुपये पर आ गया।

भारत में महंगाई पर असर क्यों नहीं?

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की महंगाई दर फिलहाल बहुत कम है, इसलिए तेल की बढ़ी कीमत का तुरंत बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • लगातार गिरती महंगाई: 2023-24 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार महंगाई दर 5.4% थी, जो 2024-25 में 4.6% और 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में सिर्फ 1.8% रह गई।

  • आरबीआई का लक्ष्य: जनवरी 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 2.75% थी, जो रिजर्व बैंक के 2–4% टॉलरेंस बैंड के निचले स्तर के करीब है।

  • ब्याज दरों में राहत: महंगाई नियंत्रण के लिए आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक पॉलिसी रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है।

सरकार ने आम जनता को बचाने के लिए उठाए कदम

  • इनकम टैक्स में छूट: 12–12.75 लाख रुपये सालाना आय तक की राशि टैक्स फ्री कर दी गई।

  • जीएसटी दरों में कटौती: उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की वस्तुएं और सेवाएं सस्ती बनाई गईं।

  • खाद्य सुरक्षा: अनाज के स्टॉक बढ़ाए गए और जरूरत पड़ने पर आयात आसान व निर्यात सीमित किया गया।

आगे क्या हो सकता है?

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में अनुमानित 10% की वृद्धि होती है और इसका पूरा भार घरेलू बाजार पर डाला जाता है, तो महंगाई में सिर्फ 0.3% की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, लंबी अवधि में महंगाई पर असर एक्सचेंज रेट, वैश्विक मांग-आपूर्ति और मौद्रिक नीतियों जैसी कई चीजों पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष: मजबूत आर्थिक नीतियों और उपायों के कारण भारत फिलहाल वैश्विक तेल संकट से महंगाई के मोर्चे पर सुरक्षित दिखाई दे रहा है।