गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। पिचाई भारत में आयोजित होने वाले ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने आए हैं और 20 फरवरी को समिट का मुख्य भाषण देंगे। भारत पहुंचते ही पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत लौटकर बहुत खुशी हुई और हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
पीएम मोदी ने किया स्वागत और बातचीत
पीएम मोदी ने अपने X अकाउंट पर कहा कि पिचाई से मिलकर खुशी हुई और भारत में एआई क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और प्रतिभाशाली छात्रों एवं पेशेवरों के साथ गूगल की संभावित साझेदारी पर चर्चा हुई।
गूगल की प्रतिबद्धता: भारत के एआई परिवर्तन में साझेदारी
पिचाई ने कहा कि भारत एआई के क्षेत्र में असाधारण प्रगति के लिए तैयार है और गूगल देश के एआई परिवर्तन में पूरी तरह साझेदार है। उन्होंने बताया कि एआई जीवन के हर पहलू में बदलाव ला सकता है – स्वास्थ्य में बेहतर डायग्नोस्टिक्स से लेकर किसानों को रियल-टाइम अलर्ट देने तक।
उन्होंने भारत की बहुभाषी और विविध डिजिटल पारिस्थितिकी को नवाचार के लिए मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एआई के लोकतांत्रिक उपयोग का मॉडल बन सकता है। पिचाई ने जोर दिया कि एआई विकास में भरोसा, सुरक्षा और समावेशिता मुख्य प्राथमिकताएँ होनी चाहिए, ताकि तकनीक स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में वास्तविक लाभ पहुँचा सके।
इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव की घोषणा
पिचाई ने 'इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव' की घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों को जोड़ने के लिए नए सबसी केबल रूट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गूगल भारत में फुल-स्टैक कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है और इसके भविष्य को लेकर उत्साहित हैं।
पिचाई ने भारत में 15 अरब डॉलर के एआई हब की योजना का भी जिक्र किया, जिसमें गीगावॉट-स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होंगे, जिससे रोजगार सृजन और उन्नत एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा।
स्किलिंग और शिक्षा में पहल
गूगल ने छात्रों और शुरुआती करियर पेशेवरों के लिए गूगल एआई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रोग्राम की शुरुआत की, जो अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध होगा। अन्य पहलों में शामिल हैं:
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कर्मयोगी भारत के माध्यम से 2 करोड़ सरकारी कर्मचारियों का समर्थन
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अटल टिंकरिंग लैब्स के 10,000 स्कूलों में जेन एआई टूल्स की शुरुआत
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30 मिलियन डॉलर का एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज
पिचाई ने कहा कि एआई का असली प्रभाव तब होता है जब इसे समुदायों और संस्थानों के साथ मिलकर विकसित किया जाए। इसलिए गूगल IITs, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी करके जिम्मेदार और व्यापक स्तर पर एआई को लोगों तक पहुँचाने पर जोर दे रहा है।