अमेरिका द्वारा ईरान के कारोबारी साझेदार देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बावजूद भारत पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। इसकी वजह यह है कि ईरान भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की सूची में शीर्ष 50 देशों में शामिल नहीं है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की।

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.6 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 0.15 प्रतिशत ही है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार में और गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में ईरान का कुल आयात लगभग 68 अरब डॉलर रहा। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात का रहा, जहां से ईरान ने करीब 21 अरब डॉलर का आयात किया, जो कुल आयात का लगभग 30 प्रतिशत है। इसके बाद चीन से 17 अरब डॉलर (26 प्रतिशत), तुर्किये से 11 अरब डॉलर (16 प्रतिशत) और यूरोपीय संघ से करीब छह अरब डॉलर (9 प्रतिशत) का आयात हुआ। भारत से ईरान का आयात केवल 1.2 अरब डॉलर रहा, जो कुल आयात का करीब 2.3 प्रतिशत है।

भारत पर नकारात्मक असर की संभावना कम: फियो

निर्यातकों के शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने भी स्पष्ट किया है कि भारतीय कारोबारियों द्वारा ईरान के साथ व्यापार पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में रहकर किया जा रहा है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि भारतीय कंपनियां और बैंक ईरान पर लागू अमेरिकी OFAC प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत मुख्य रूप से खाद्य सामग्री और दवाइयों जैसे उन क्षेत्रों में ही कारोबार कर रहा है, जिन पर किसी तरह की रोक नहीं है। ऐसे में भारत पर किसी बड़े प्रतिकूल असर की आशंका फिलहाल नहीं दिखती, हालांकि ट्रंप प्रशासन की अधिसूचना जारी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

भारत-ईरान व्यापार में किन वस्तुओं की भूमिका

भारत से ईरान को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, सिंथेटिक फाइबर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं। वहीं, ईरान से भारत मुख्य रूप से सूखे मेवे, अकार्बनिक और कार्बनिक रसायन तथा कांच से बने उत्पादों का आयात करता है।

चाबहार परियोजना भारत-ईरान संबंधों की अहम कड़ी

इस बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि भारत और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार पर खड़े हैं, जो समय के साथ और मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क, व्यापारिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच मजबूत संबंध इसकी बुनियाद हैं। दूतावास ने चाबहार बंदरगाह परियोजना को भारत-ईरान साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित यह बंदरगाह दोनों देशों के बीच संपर्क, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।