जिस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुजफ्फरनगर के प्रदर्शनी मैदान में आयोजित रोजगार महा मेले में जरूरतमंद युवाओं को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे, उस समय हजारों युवा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र नोएडा व ग्रेटर नोएडा को अराजकता की आग में धूं-धूं जला रहे थे। 20 से 25 वर्ष की आयु के नौजवान गुरिल्ला युद्ध की तरह छोटी-छोटी टुकड़ियों में बंट कर पूरे औद्योगिक क्षेत्र में फैल गए और हर सड़क तथा गलियारे को घेर कर ईंट, पत्थर, मिट्टी के तेल तथा पैट्रोल, लाठी डंडे लेकर फैक्ट्रियों में घुस गये तथा भयंकर तोड़फोड़ व आगजनी शुरू कर दी। सर्वप्रथम फेज-2 की मदन फैक्ट्री को आग के हवाले किया गया, फिर पूरा औद्योगिक इलाका हिंसा, आगजनी की चपेट में आ गया। एक-एक कर दर्जनों फैक्ट्रियों-कारखानों को ही न आग के हवाले किया गया, बल्कि सैकड़ों की संख्या में वाहनों को भी भस्म कर दिया गया। यह सब इस प्रकार से किया जा रहा था मानो श्रमिक अशांति की आड़ में मोदी और योगी के विरुद्ध जंग छेड़ दी गई हो क्योंकि आगजनी के बीच सोशल मीडिया पर मोदी हटाओ, देश बचाओ की पोस्ट डालनी शुरू हो गई। अदानी-अंबानी को प्रश्रय देने के आरोप लगने लगे।
इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट, रामजस कॉलेज, मिरांडा हाउस कॉलेज को उड़ाने की धमकियों भरे पोस्ट डाले गये। राजधानी पुलिस इन धमकियों की जांच-पड़ताल में उलझी रही और दिल्ली से सटा नोएडा लपटो मे घिर गया। योगी जी को इस षड्यंत्रकारी घटना का समाचार मुजफ्फरनगर मे ही मिल गया था उन्होंने जिला प्रशासन को सख्ती बरतने और मामले को निपटाने का यही से आदेश दिया।
आगजनी कराने वाले श्रमिक नेताओं का कहना है कि फैक्ट्री वाले मजदूरों को मात्र 9 हजार रूपये वेतन नहीं देते हैं। आठ घंटे के बजाय 12 घंटे काम लेते हैं। उनका वेतन 20 हजार रु मासिक और ओवरटाइम दोगुणा दिया जाये। इन मांगो के लिए देश के सबसे बड़े औद्योगिक शहर को फूंकने का कोई औचित्य नहीं । सीधे-सीधे यह खतरनाक साजिश थी गौतमबुद्धनगर के जिला अधिकारी ने अब ओवर टाइम दोगुणा करने, वेतन बढ़ाने तथा निकाले गये श्रमिकों को पुनः भर्ती करने का आदेश दिया है। क्या यह घोषणा पहले नहीं की जा सकती थी? इस दुर्भाग्य पूर्ण घटना से उन लोगो के कलेजो मे ठंडक पड़ी होगी।
जो भारत मे भी नेपाल व बांग्लादेश जैसी अराजकता चाहते थे। सरकार प्रकरण की तुरंत जांच कराये।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'