लगभग एक वर्ष पूर्व हमने 'देहात' के न्यूज पोर्टल पर लिखा था कि मुजफ्फरनगर की पुरानी सरवट-सिसौना रोड को 'कच्ची सड़क' बोलना-लिखना बन्द किया जाये क्योंकि जिसे 6 दशक पूर्व कच्ची सड़क पुकारा जाता था, वह वास्तव में कच्ची ही थी किन्तु अब तो वह दशकों से पक्की बन चुकी है, इसे अब कच्ची कहना हिमाकत और अनौचित्यपूर्ण है।

जिला अस्पताल तिराहे पर राजमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति स्थापना के बाद (अब 13 अप्रैल, 2026 को माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी राजमाता की नयी भव्य मूर्ति का अनावरण करेंगे) तो इस मार्ग को कच्ची सड़क कहना और भी हास्यास्पद, अटपटा लगता है। 'देहात' ने पालिका चेयरपर्सन श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप को तथा अन्य सभासदों को सुझाव दिया था कि सरवट-सिसौना रोड को कच्ची सड़क के बजाय रानी अहिल्याबाई मार्ग घोषित करने का प्रस्ताव बोर्ड की बैठक से पारित कराकर राज्य सरकार को प्रेषित किया जाए किन्तु न तो नगर पालिका परिषद, न ही जन प्रतिनिधियों ने इस पर गौर किया।

अस्पताल तिराहे पर नयी प्रतिमा स्थापना के लिए श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप बधाई की पात्र हैं। मीनाक्षी चौक का नाम अटल चौक रखकर उन्होंने प्रशंसनीय काम किया। वे कच्ची सड़क का नाम रानी अहिल्याबाई होल्कर मार्ग रखने के लिए आवश्यक पग उठायें। उनका यह व्यावहारिक क़दम होगा।

साथ ही यह भी कहेंगे कि गाजीवाला पुलिया का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर 'वाल्मीकि पुलिया' रखा जाए। 'गाज़ी' इस्लामी आक्रमणकारियों का प्रतीक शब्द है। सन् 1633 में जब शाहजहां के सरदार मुजफ्फर खाँ ने सरवट (श्रवण खेड़ा) व मुझेड़ा को मिला कर मुजफ्फरनगर बसाया, तब गाजीवाला शब्द सामने आया। गुलामी का यह प्रतीक शब्द भी हटाया जाना चाहिये।

गोविंद वर्मा

संपादक 'देहात'