नई दिल्ली। मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि और गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा में शामिल करीब 22.79 लाख छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। नई परीक्षा तिथियों की घोषणा अगले दस दिनों के भीतर की जाएगी। हालांकि, दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को किसी नए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी और उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले ली गई फीस वापस की जाएगी और पुनर्परीक्षा का पूरा खर्च एजेंसी स्वयं वहन करेगी। परीक्षा केंद्रों में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को देश-विदेश के 565 शहरों में लगभग 5,500 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि छात्रों के हित और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
मामले की गंभीरता तब सामने आई जब राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को एक मॉडल प्रश्नपत्र मिला, जिसमें 410 में से 140 से अधिक प्रश्न वास्तविक परीक्षा से हूबहू मेल खाते पाए गए। इसके बाद यह जानकारी एनटीए और केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंची, जिससे जांच तेज कर दी गई।
प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि होने के बाद केंद्र सरकार की अनुमति से परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या प्रश्नपत्र लीक किसी प्रकाशन या परीक्षा से जुड़े नेटवर्क के जरिए हुआ था या इसमें किसी बड़े गठजोड़ की भूमिका है।
यह पहली बार है जब नीट-यूजी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह रद्द किया गया है। इससे पहले भी गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन हर बार एनटीए ने इन्हें खारिज किया था या केवल आंशिक कार्रवाई की गई थी।
इधर, सीबीआई ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है और विशेष टीमें गठित कर विभिन्न शहरों में भेजी गई हैं। एजेंसी ने कहा है कि वह जल्द ही इस पूरे प्रकरण में शामिल लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करेगी।