मुंबई। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन से पूरे देश के संगीत जगत में शोक की लहर है। 89 वर्ष की आयु में मुंबई स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया गया है कि वह लंबे समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।

उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई शीर्ष नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया है।

पीएम मोदी ने बताया भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर और आत्मीय आवाज ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि उनके गीतों ने संगीत प्रेमियों और सिनेमा दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया।

पीएम मोदी ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

महाराष्ट्र के नेताओं ने भी जताया शोक

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन से भारतीय संगीत जगत की एक बेहद सुमधुर आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई है। उन्होंने उनके छह दशकों से अधिक लंबे करियर और विभिन्न भाषाओं में दिए गए योगदान को याद किया।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने मराठी, हिंदी, गुजराती और बंगाली भाषाओं में उनके योगदान को संगीत जगत की अमूल्य धरोहर बताया।

नितिन गडकरी ने भी दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सुमन कल्याणपुर के निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज ने हजारों गीतों को अमर बना दिया और वे हमेशा श्रोताओं के दिलों में जीवित रहेंगी।

लंबा और शानदार संगीत सफर

28 जनवरी 1937 को जन्मी सुमन कल्याणपुर का असली नाम सुमन हेम्माडी था। उन्होंने सात दशकों से अधिक समय तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहकर अपनी अमिट पहचान बनाई।

उनके लोकप्रिय गीतों में “ना तुम हमें जानो”, “आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे”, “ना ना करते प्यार”, “मेरा प्यार भी तू है” और “बहना ने भाई की कलाई पे” जैसे कई सदाबहार गीत शामिल हैं।

उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली और गुजराती सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

पद्म भूषण से सम्मानित

भारतीय संगीत में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 2023 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था।