नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को व्हाइट हाउस में आयोजित मेडल ऑफ ऑनर समारोह में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने अमेरिकी सेना के जवानों को सम्मानित किया और ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इस्राइल सैन्य अभियान पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

ईरान पर हमला आवश्यक कदम: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए गंभीर खतरा बन गया था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में इसे “खौफनाक खतरे को खत्म करने का अंतिम और सबसे सुरक्षित अवसर” बताया। ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक समर्थन प्राप्त था।

ओबामा के फैसले की आलोचना
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के ईरान परमाणु समझौते को “खतरनाक और असफल” करार देते हुए अपनी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर वह समझौता जारी रहता, तो ईरान के पास तीन साल पहले ही परमाणु हथियार होते और उनका इस्तेमाल कर चुका होता। ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस समझौते से अलग कर दिया था।

संभवतः चार हफ्ते तक चलेगा युद्ध
ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चार हफ्तों से अधिक समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस अभियान को और लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार है। एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्ध लंबा चला तो अमेरिका पूरी मजबूती के साथ कार्रवाई करता रहेगा।

ईरान के साथ समझौता नहीं किया जा सकता
ट्रंप ने ईरान पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आप इन लोगों से भरोसा नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने दो बार समझौतों से पीछे हटकर अमेरिका का विश्वास तोड़ा। पहले ऐसा लगा कि समझौता हो गया, लेकिन बाद में ईरान ने कदम वापस खींच लिया।