पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाए जा रहे हैं कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल रहा है। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से तेल और गैस की आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। ऐसे में इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

जहाजों से वसूली की जानकारी

सूत्रों के मुताबिक, कुछ जहाजों से प्रति यात्रा लगभग 20 लाख डॉलर तक शुल्क वसूला जा रहा है। यह वसूली किसी आधिकारिक नियम के तहत नहीं, बल्कि अलग-अलग मामलों में की जा रही है। कई शिपिंग कंपनियों ने यह भुगतान किया है, लेकिन मुद्रा और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। इससे शिपिंग उद्योग में चिंता और असमंजस बढ़ गया है।

ईरान की मंशा क्या हो सकती है?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम ईरान के प्रभाव को दिखाता है, क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। युद्ध के चलते जहाजों की आवाजाही पहले ही सीमित हो गई थी और अब शुल्क की मांग ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, ईरान भविष्य में इस शुल्क को औपचारिक रूप देने की योजना बना सकता है। हाल ही में वहां के एक सांसद ने प्रस्ताव दिया था कि इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले देशों से शुल्क लिया जाए। यदि यह कानून बनता है, तो वैश्विक व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

पड़ोसी देशों की चिंता

सऊदी अरब और यूएई जैसे तेल उत्पादक देशों ने इस कदम को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे उनके तेल निर्यात पर असर पड़ेगा। कई देश अब वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों के जरिए तेल की आपूर्ति करने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है, और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बनता जा रहा है।