नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा है कि कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाज इस समुद्री मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि इसके लिए जहाजों को पहले ईरानी अधिकारियों से समन्वय करना होगा और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ेगा।
वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी थी चिंता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई थी। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता तो कई देशों में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी और कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस मुद्दे को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर यह मार्ग बाधित रहता है तो तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है।
गुटेरेस ने अमेरिका और इजराइल से अपील की है कि वे क्षेत्र में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए कदम उठाएं, क्योंकि इसका सीधा असर आम नागरिकों और वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने ईरान से भी पड़ोसी देशों पर हमले रोकने की अपील की।
भारत के लिए राहत भरी खबर
ईरान के इस फैसले को भारत के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आने वाले तेल पर निर्भर करता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता था।
ईरान पहले भी यह संकेत दे चुका था कि जिन देशों के जहाज उसके खिलाफ गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, उन्हें इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। अब नई व्यवस्था के तहत हर जहाज को यात्रा से पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी और तय सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।