वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और पाकिस्तान की ओर से एक संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिए हैं कि संघर्ष विराम की दिशा में तैयार किए गए प्रारंभिक समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इस दावे पर फिलहाल संयम बरतने की सलाह दी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि संबंधित पक्ष एक प्रारंभिक मसौदे पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं। उनके अनुसार, समझौते से जुड़े औपचारिक कदमों के बाद तकनीकी स्तर पर आगे की बातचीत भी की जाएगी।
उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए दावा किया कि समझौता अंतिम रूप लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सहमति बनती है तो वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से संचालित हो सकेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिल सकती है।
हालांकि ईरान की ओर से इस मामले में अलग रुख देखने को मिला। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि समझौते की तारीख को लेकर अभी कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन किसी निश्चित समयसीमा की घोषणा करना जल्दबाजी होगी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब युद्ध समाप्ति को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हों। इससे पहले भी कई मौकों पर समझौते की संभावनाएं बनीं, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि प्रस्तावित मसौदे में अभी भी बदलाव की गुंजाइश मौजूद है। उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियां यह दिखाती हैं कि संघर्ष के बाद ईरान की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।
इस बीच अमेरिकी सैन्य कार्रवाई भी चर्चा में रही। रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे कुछ ईरानी ड्रोन को अमेरिकी बलों ने मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये ड्रोन समुद्री यातायात के लिए खतरा बन सकते थे। बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की बात कही।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग दौर की वार्ता का भी प्रस्ताव है।
जानकारों का कहना है कि समझौते की सबसे बड़ी चुनौती परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण को लेकर ठोस कदम उठाए, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में नहीं दिख रहा।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान अपनी जमी हुई विदेशी संपत्तियों की वापसी और तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में राहत चाहता है। बदले में वह होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल करने पर विचार कर सकता है।
वहीं इजराइल ने स्पष्ट किया है कि वह प्रस्तावित समझौते का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं होगा। इजराइली नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का अधिकार बनाए रखेगा।
फिलहाल सभी पक्षों की नजरें आगामी वार्ताओं पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो यह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।