तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने के अपने देश के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि वार्ता हमेशा सम्मान और तर्क के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यह बयान सरकारी विभागों के जनसंपर्क कार्यक्रम ‘ईरानियन नैरेटर्स’ के दौरान दिया।
उन्होंने कहा कि बातचीत से इनकार करना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार, यदि कूटनीतिक संवाद नहीं किया जाएगा तो समस्याओं का समाधान कैसे निकलेगा। पेजेशकियन ने जोर देकर कहा कि ईरान सम्मानजनक तरीके से बातचीत जारी रखेगा, लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा से पीछे नहीं हटेगा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रीय एकता और आंतरिक समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिशों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
पेजेशकियन ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी ताकतें ईरान को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं और क्षेत्रीय तनावों को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने हाल के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि गाजा और फिलिस्तीन में हुई घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिले हैं, जिसे उन्होंने पक्षपाती बताया।
उन्होंने दोहराया कि ईरान कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रखेगा, लेकिन किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय संप्रभुता और अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।
इसी बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के लिए समय तेजी से समाप्त हो रहा है और उसे जल्द निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरेनियम भंडार, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत पहले से ही ठप पड़ी हुई है।