भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही इस क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की भारी कमी भी सामने आने लगी है। कंपनियों को AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े पदों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

मानव संसाधन कंसल्टिंग फर्म रैंडस्टैड डिजिटल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में AI सॉल्यूशंस लीड के 10.3% और मशीन लर्निंग इंजीनियर के 11.2% पद अभी तक खाली हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि किसी क्षेत्र में रिक्तियों की दर 10% से अधिक हो जाए, तो उसे गंभीर टैलेंट गैप माना जाता है।

दुनियाभर में भी AI स्किल्स की कमी

रिपोर्ट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी AI विशेषज्ञों की कमी को उजागर करती है। अमेरिका में AI सॉल्यूशंस लीड के लगभग 27% पद खाली हैं, जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा 18% के आसपास है। मशीन लर्निंग इंजीनियरों की बात करें तो अमेरिका में 8.2% पद अभी भरे नहीं जा सके हैं।

जापान की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बताई गई है, जहां AI इंजीनियरों के 46.8% और जनरेटिव AI इंजीनियरों के 25% पद खाली हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विकसित देश भी AI टैलेंट की कमी से जूझ रहे हैं।

भारत बन रहा AI जॉब्स का बड़ा हब

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक AI जॉब ओपनिंग्स में से लगभग आधी नौकरियां केवल अमेरिका और भारत में हैं। अमेरिका की हिस्सेदारी 29% है, जबकि भारत 20.5% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI जॉब मार्केट बन चुका है।

रैंडस्टैड डिजिटल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलिंद शाह के अनुसार, भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन एडवांस AI स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की उपलब्धता अभी भी मांग के मुकाबले कम है। यही कारण है कि कंपनियों को भर्ती में अधिक समय लग रहा है।

भर्ती प्रक्रिया हुई धीमी

AI सेक्टर में विशेषज्ञों की कमी का असर भर्ती समय पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में AI मैनेजर की भर्ती में औसतन 53 दिन लग रहे हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले यह प्रक्रिया लगभग 25 दिनों में पूरी हो जाती थी। इससे साफ है कि सही उम्मीदवार ढूंढना अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

AI स्किल्स की मांग में भारी उछाल

रिपोर्ट बताती है कि भारत में AI-स्किल्ड डेवलपर्स की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है। 2021 की तुलना में 2026 की शुरुआत तक AI सक्षम डेवलपर्स की मांग में 660% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके विपरीत पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की मांग में वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI और मशीन लर्निंग से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग और तेजी से बढ़ेगी, जिससे यह क्षेत्र युवाओं के लिए बड़े करियर अवसरों का केंद्र बन सकता है।