ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की उम्मीद लगाए हुए थे। ट्रंप के शुरुआती ट्वीट और बयानों ने कई लोगों को यह भरोसा दिलाया कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है। लेकिन बाद में जब ट्रंप ने अपना रुख बदल लिया, तो यह विश्वास धक्का खा गया।
प्रदर्शनकारी अब कह रहे हैं कि ट्रंप ने उन्हें गुमराह किया और मुश्किल घड़ी में अकेला छोड़ दिया। शुरुआत में ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और ईरानी सरकार को चेताया कि अगर शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार है।
ट्रंप के बयान और प्रदर्शन तेज़
ट्रंप के 'मदद रास्ते में है' जैसे शब्दों को कई प्रदर्शनकारियों ने सीधे समर्थन या सैन्य हस्तक्षेप की संभावना के रूप में देखा। इससे बड़ी संख्या में ईरानी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने खुलकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान यह भी खबरें आईं कि अमेरिका ने क्षेत्र में अपने बड़े सैन्य अड्डे से गैर-जरूरी कर्मचारियों को हटा दिया है, जिसे संभावित कार्रवाई की तैयारी माना गया।
जैसे-जैसे प्रदर्शन बढ़े, ईरानी सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए और सुरक्षा बलों को तैनात किया। कई इलाकों में हिंसा की खबरें आईं, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने स्नाइपर और मशीनगन का इस्तेमाल किया। कई लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लापता हुए।
ट्रंप का अचानक रुख बदलाव
कुछ ईरानियों का मानना है कि केवल उनकी सरकार ही नहीं, बल्कि ट्रंप भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। उनके बयानों ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया, लेकिन अचानक ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेता भरोसा दिला चुके हैं कि अब हत्याएं और फांसी नहीं होगी और अमेरिका कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।
यह बदलाव प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ा झटका था। तेहरान के एक कारोबारी ने कहा, "ट्रंप ने हमें भरोसा दिलाया और फिर पीछे हट गए, जिसके कारण लोगों की जान खतरे में पड़ गई।"
ट्रंप पर नाराजगी
कई प्रदर्शनकारी अब ट्रंप को जिम्मेदार मान रहे हैं। कुछ लोगों का अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ हो। तेहरान की एक महिला ने कहा, "हमारी सारी उम्मीदें टूट गईं। ट्रंप हमारी परवाह नहीं करते।"
स्थिति तब और जटिल हो गई जब ईरानी अधिकारी ट्रंप के बयानों का मजाक उड़ाने लगे और अपनी सख्ती जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारी हताश हो गए और अधिकांश का मानना है कि फिलहाल आंदोलन कमजोर पड़ चुका है। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि ट्रंप का रुख रणनीतिक हो सकता है और इसका उद्देश्य ईरानी सरकार को भ्रमित करना है।