मिडिल ईस्ट में ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर बमबारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नरमी का इशारा किया है। जंग के 10वें दिन ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौते के लिए बातचीत संभव है, लेकिन यह पूरी तरह उन शर्तों पर निर्भर करेगा, जिन पर ईरान सहमति देगा।
ट्रंप का बयान और बातचीत का संकेत
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेता बातचीत के लिए तैयार हैं और लगातार संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा,
"मैं बातचीत करने में कोई दिक्कत नहीं महसूस कर रहा, लेकिन सब कुछ शर्तों पर निर्भर करेगा। शुरू से ही हम समझौता चाहते थे, लेकिन ईरान टाल-मटोल करता रहा।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस, चीन और फ्रांस ने सीजफायर की पहल की है।
समझौते की अहमियत
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वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सलाहकारों ने राष्ट्रपति से ईरान के साथ समझौते का रास्ता खोजने को कहा है। उनका मानना है कि युद्ध लंबा खिंचने से अमेरिका को भारी नुकसान हो सकता है।
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एसोसिएटेड प्रेस ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ईरान में तख्तापलट की संभावना नहीं है क्योंकि जनता इसके लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप ने ईरान पर हमले को जायज ठहराया और कहा कि जब उनके प्रतिनिधि विटकॉफ और जेरेड कुशनेर बातचीत के लिए गए, तो ईरान ने टालमटोल किया। उन्होंने बताया कि ईरान 11 परमाणु हथियार बनाने की तैयारी में था, जिसके बाद हमले का निर्णय उचित लगा।
उन्होंने खाड़ी देशों पर हमले के लिए भी ईरान की आलोचना की और कहा कि जिन देशों ने हमला नहीं किया, उन पर भी बम गिराए गए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा – हमले जारी रहेंगे
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने कहा कि ईरान अब अकेला है और अमेरिका उस पर हमले जारी रखेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 11 मार्च को और मजबूत हमला होगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अब तक ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने के लिए 2000 ड्रोन और 500 मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।