पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की स्थिति दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है। अमेरिकी और इस्राइली हमलों के बीच ईरान भी कड़ा जवाब दे रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।

इस बीच, ईरान के मिनाब शहर में हुए धमाके से जुड़ी नई जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवतः अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से हुआ। विस्फोट स्कूल के पास हुआ, जिससे 165 से ज्यादा मासूम बच्चियों की जान चली गई।

घटना का विवरण

यह घटना 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मिनाब शहर में हुई। धमाका उस स्कूल के पास हुआ जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के सैन्य अड्डे के बिल्कुल नजदीक था।

नया वीडियो और विश्लेषण

जांच संस्था बेलिंगकैट ने इस हमले का नया वीडियो विश्लेषित किया। वीडियो उसी दिन रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन इसे बाद में मेहर समाचार एजेंसी ने जारी किया। वीडियो में मिसाइल इमारत से टकराती दिखाई देती है और आसमान में काले धुएं का गुबार उठता नजर आता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह हमला ईरान ने खुद किया होगा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है। टॉमहॉक मिसाइल अमेरिकी कंपनी रेथियॉन बनाती है और इसे केवल कुछ सहयोगी देशों को बेचा जाता है।

सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि

एपी न्यूज ने वीडियो की लोकेशन की जांच की और पाया कि यह मिनाब के स्कूल के पास ही रिकॉर्ड किया गया था। सैटेलाइट तस्वीरों में बिजली के खंभे, इमारतें और वाहन वीडियो में दिखाई दे रही चीज़ों से मेल खाते हैं। बेलिंगकैट के शोधकर्ताओं ने कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल टॉमहॉक क्रूज मिसाइल जैसी लगती है, जिसका उपयोग आमतौर पर अमेरिकी सेना करती है।

अमेरिकी सेना की स्वीकारोक्ति

अमेरिकी मध्य कमान ने भी यह स्वीकार किया है कि उसने इस युद्ध में टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, 28 फरवरी को अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस स्प्रुअंस से मिसाइल दागे जाने की तस्वीरें सामने आई थीं।

अन्य संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य कई कारणों से इस हमले की जिम्मेदारी अमेरिका की ओर जाती दिखती है। धमाके के पास IRGC का सैन्य अड्डा और नौसेना की बैरक थी। अमेरिका पहले भी इस इलाके में नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाने की बात मान चुका है। वहीं, इस्राइल ने कहा कि उसने हमला नहीं किया और उसके हमले आमतौर पर ईरान के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून की चुनौती

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ ने कहा कि अगर स्कूल पर हमला गलती से हुआ है, तब भी यह गंभीर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले यह तय करना जरूरी है कि लक्ष्य वास्तव में सैन्य है या नहीं।

अभी तक, युद्ध के कारण स्वतंत्र जांच एजेंसी मौके पर नहीं पहुंच पाई है। मिसाइल के अवशेष की तस्वीरें भी सामने नहीं आई हैं, जिससे पूरी सच्चाई का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। लेकिन नए वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों ने अमेरिका की भूमिका पर शक को और बढ़ा दिया है।