बांग्लादेश में 2024 के बाद पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव संपन्न हुए और इसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज की। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान, जो खालिदा जिया के बेटे हैं, बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। चुनाव परिणामों ने न केवल राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया है, बल्कि देश के पड़ोसी और क्षेत्रीय हितों पर भी असर डाला है।

जमात और छात्र नेताओं के लिए बड़ा झटका

इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान जमात ए-इस्लामी और छात्र नेताओं की नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) को हुआ। इनका गठबंधन शेख हसीना की सरकार को गिराने का सपना लिए था, लेकिन जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया। कट्टरता और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का काला इतिहास इनकी हार में निर्णायक रहा।

शांतिदूत मोहम्मद यूनुस भी पीछे

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस, जिन्हें शांति का प्रतीक माना जाता है, इस चुनाव में अप्रभावी साबित हुए। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और हक़ के सवालों पर उनकी भूमिका खामोश रही, जिससे उनका असर कम हो गया।

तारिक रहमान का रणनीतिक खेल

BNP अध्यक्ष तारिक रहमान ने सियासी मैदान पर कुशल रणनीति अपनाई। उन्होंने हिंदू बहुल क्षेत्रों में सुरक्षा और समानता का वादा कर वोट बैंक मजबूत किया। उनके नेतृत्व में BNP ने 299 सीटों में से 212 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।

भारत के हितों पर प्रभाव

भारत के लिए यह नतीजा सकारात्मक माना जा रहा है। BNP ने भारत से मजबूत और संतुलित संबंध बनाने का वादा किया है, जबकि पाकिस्तान समर्थित जमात का प्रभाव कम हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है।

अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा और आशा

BNP के घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा का वादा शामिल है। चुनाव में हिंदू बहुल सीटों पर BNP की जीत इस आश्वासन का प्रतिफल रही। हिंदुओं ने जमात की कट्टरता को मतदान के जरिए नकारा।

बीते दो साल की हिंसा और लोकतंत्र की कमी

अगस्त 2024 में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ। इसके बाद हिंसा और डर का माहौल पैदा हुआ, जिसमें हिंदुओं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। पूजा स्थलों पर हमले और हत्याओं का सिलसिला लगातार जारी रहा। BNP की जीत ने कट्टरपंथ और हिंसा के इस दौर को रोकने की उम्मीद जगाई है।

NCP और जमात का पतन

NCP और जमात ने पाकिस्तान के समर्थन पर ही अपनी राजनीति चलाई। जनता ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया कि कट्टरता और बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। NCP को केवल 6 सीटें मिलीं, जबकि जमात की मनमानी और शरिया लागू करने की योजनाएँ विफल रहीं।

भविष्य की दिशा

अब बांग्लादेश की कमान तारिक रहमान के हाथों में है। उनके नेतृत्व में लोकतंत्र मजबूत होगा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा होगी, और भारत-बांग्लादेश के संबंध बेहतर होंगे। जमात की मजहबी मनमानी अब आसान नहीं चलेगी, और पाकिस्तान के हस्तक्षेप की संभावना कम हो जाएगी।