इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि को लेकर आयोजित एक सेमिनार के दौरान पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने भारत के खिलाफ तीखे और विवादित बयान दिए हैं। यह बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर लिए गए फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को लेकर सख्त रुख अपनाया था, जिसके बाद पाकिस्तान गंभीर जल संकट और कूटनीतिक दबाव का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान नेताओं की भारत पर टिप्पणी

सेमिनार में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार, PPP नेता बिलावल भुट्टो और मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत का नाम लिए बिना सख्त बयान दिए।

इशाक डार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि को एकतरफा खत्म करने का भारत का फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह ऐसी संधि की शर्तों को मनमाने तरीके से रोक या समाप्त कर दे।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या कम करने की किसी भी कोशिश को गंभीर परिणामों वाला कदम माना जाएगा। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

बिलावल भुट्टो का बयान

बिलावल भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

उन्होंने पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपने संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुसादिक मलिक की टिप्पणी

पाकिस्तानी मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि सिंधु जल संधि केवल दो देशों का समझौता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है।

उन्होंने दावा किया कि यह समझौता कई युद्धों के दौरान भी बना रहा, इसलिए इसका टूटना वैश्विक स्तर पर गंभीर संकेत होगा।

भारत का रुख

भारत की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा था कि बार-बार उकसावे और पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण भारत को संधि पर पुनर्विचार करना पड़ा।

सिंधु जल संधि पर तनाव क्यों बढ़ा?

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों में कटौती हुई, सीमाएं प्रभावित हुईं और वीजा व्यवस्था पर भी असर पड़ा।

सिंधु जल संधि क्या है?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। इसके तहत पूर्वी नदियां भारत के नियंत्रण में हैं, जबकि पश्चिमी नदियों का जल पाकिस्तान को दिया जाता है। कई युद्धों और तनावों के बावजूद यह समझौता दशकों तक कायम रहा।