मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां शिवसेना UBT छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए सचिन अहीर को महाराष्ट्र विधान परिषद का उप-सभापति चुन लिया गया है। यह चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ, क्योंकि महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार जे.एम. अभ्यंकर ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
सूत्रों के अनुसार, अभ्यंकर ने नामांकन क्यों वापस लिया, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने उनसे नाम वापस लेने का अनुरोध किया था।
राजनीतिक हलचल और उद्धव गुट को झटका
इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सचिन अहीर ने मंगलवार को ही उद्धव गुट से अलग होकर शिंदे गुट का समर्थन किया था और उसी के बाद उन्होंने उप-सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था।
यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब उद्धव गुट पहले से ही अपने कई सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है।
सचिन अहीर का राजनीतिक सफर
सचिन अहीर मुंबई के वर्ली क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं और उन्हें आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता था। उनके अचानक पाला बदलने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अहीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी, बाद में वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हुए और फिर अविभाजित शिवसेना का हिस्सा बने।
शिंदे गुट में शामिल होने के बाद स्थिति
2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए राजनीतिक विद्रोह के बाद बनी नई शिवसेना (शिंदे गुट) में अब सचिन अहीर भी शामिल हैं। उसी साल वे विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे।
पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार, पाला बदलने के बाद बुधवार सुबह उनके आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई, जबकि उनके समर्थकों की आवाजाही भी बढ़ गई। उनकी नई भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।