अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और तनाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल जमीन पर अमेरिकी सैनिक तैनात करने की संभावना कम है। न्यूजनेशन की रिपोर्टर केली मेयर के साथ बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब के रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले और वहां हुए नुकसान का बदला जल्द लिया जाएगा। हालांकि, सोमवार तक इस जंग में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।

ट्रंप का यह बयान पिछले दावों से अलग है। शनिवार को ईरान पर हमले के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा था कि "हर राष्ट्रपति कहता है कि जमीन पर सैनिक नहीं भेजे जाएंगे। मैं नहीं कहता, मैं सिर्फ कहता हूं शायद उनकी जरूरत न पड़े।"

युद्ध का बढ़ता दायरा
संघर्ष सोमवार को और तेज हुआ, जिसमें ईरान समर्थित मिलिशिया भी शामिल हो गए। मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में हमलों का दायरा बढ़ गया है।

ईरान ने मिसाइलें दागीं
ईरान ने इजराइल और कई अरब देशों पर मिसाइल दागीं। वहीं, हिज्बुल्ला ने लेबनान से इजराइल पर ड्रोन और रॉकेट से हमला किया। इजराइल ने इसके जवाब में बेरूत के दक्षिणी उपनगर और दक्षिणी लेबनान में भारी हवाई हमले किए। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार कम से कम 31 लोग मारे गए। इजराइल ने लंबी लड़ाई की चेतावनी भी दी है।

खामनेई की मौत के बाद तनाव
इस संघर्ष में तेजी US-इजराइल की एयर स्ट्राइक के बाद आई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई मारे गए। ईरानी रेड क्रिसेंट ने बताया कि 131 शहरों में अब तक कम से कम 555 लोगों की मौत हुई है।

ईरान ने कहा, अमेरिका से नहीं करेगा बातचीत
तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत को अस्वीकार कर दिया है। ईरानी सीनियर अधिकारी अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संकेतों के बावजूद, ईरान वार्ता नहीं करेगा।

सऊदी रिफाइनरी पर हमला
संघर्ष का असर अब ग्लोबल ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ईरानी ड्रोन ने सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया। यह रिफाइनरी रोजाना पांच लाख बैरल से अधिक तेल प्रोसेस करती है। हमला होने से संचालन कुछ समय के लिए बाधित हो गया। होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा खतरों और हमलों के चलते तेल आपूर्ति की चिंता बढ़ गई है।