भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में जेल में बंद पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) गिरिबाला सिंह को कथित वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने के आरोपों के बाद जेल प्रशासन में बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को डीआईजी जेल संजय पांडे ने भोपाल केंद्रीय जेल का औचक निरीक्षण किया और विस्तृत जांच शुरू की।
निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने उन जेल कर्मियों और अधिकारियों से पूछताछ की, जो 2 जून को गिरिबाला सिंह के जेल प्रवेश के समय ड्यूटी पर तैनात थे। साथ ही, त्विषा के पति समर्थ सिंह को दी जा रही सुविधाओं और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
जांच में सामने आया कि शुरुआत में 2 जून की रात तक सामान्य जेल प्रक्रिया का पालन किया गया था, लेकिन अगले दो दिनों में गिरिबाला सिंह को कथित तौर पर ब्लैक कॉफी समेत कुछ विशेष खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बाद उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें मेडिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि समर्थ सिंह पहले से ही चोट के चलते पुरुष बैरक के अस्पताल वार्ड में भर्ती थे।
सूत्रों के अनुसार, बिना गंभीर चिकित्सकीय आवश्यकता के केवल उम्र के आधार पर महिला बंदी को अस्पताल वार्ड में स्थानांतरित करना जेल प्रशासन की लापरवाही माना जा रहा है। इस निरीक्षण के बाद सुरक्षा प्रभारी डिप्टी जेलर जया यादव को उनके पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह एक महिला मैट्रन को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डीआईजी जेल ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट महानिदेशक जेल वरुण कपूर को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिनमें एक डिप्टी जेलर का प्रभार परिवर्तन और दूसरे का तबादला शामिल हो सकता है।
इस बीच, जेल में कथित वीआईपी ट्रीटमेंट को लेकर जांच तेज होने के बाद दोनों बंदियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पीड़ित पक्ष ने उन्हें राज्य से बाहर किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने की भी मांग उठाई है।
इधर, त्विषा शर्मा मामले की शुरुआती जांच करने वाली कटारा हिल्स थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों की ओर से वकील अंकुर पांडे ने आरोप लगाया है कि जिस बेल्ट को मामले में अहम साक्ष्य बताया गया, उसे मेडिकल जांच के लिए एम्स नहीं भेजा गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जब्ती से जुड़े दस्तावेजों पर आरोपियों के हस्ताक्षर नहीं कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।